Jadugoda : तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट से जुड़े विस्थापितों की समस्याओं और रोजगार के मुद्दे को लेकर सोमवार को जमशेदपुर अंचल पदाधिकारी की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में यूसील प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों एवं विस्थापितों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान विस्थापितों ने यूसील में कथित दलाली प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
अंचल कार्यालय जमशेदपुर में आयोजित बैठक में माइंस गेट के समीप बने अवैध भवन को सीआईएसएफ को हस्तांतरित करने सहित विभिन्न लंबित मुद्दों पर चर्चा हुई। कई मामलों के समाधान के लिए विषय को मुख्यमंत्री स्तर तक ले जाने पर सहमति बनी।
बैठक के बाद झामुमो के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी ने बताया कि यूसील की तुरामडीह एवं नान्दूप क्षेत्र से जुड़े 18 विस्थापितों को दो दिनों के भीतर नियोजन देने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि यूसील प्रबंधन के संरक्षण में बिना कार्य के वेतन प्राप्त कर रहे कर्मियों की जांच कर आवश्यकतानुसार स्थानांतरण अथवा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में यह भी तय किया गया कि यूसील से संबंधित प्रत्येक टेंडर की जानकारी तुरामडीह राजस्व ग्रामसभा को उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामसभा की अनुशंसा और स्वीकृति के बाद ही संवेदक स्थानीय पात्र लोगों को रोजगार देगा। साथ ही यूसील तुरामडीह यूनिट में संवेदकों के अधीन कार्यरत सभी ठेका कर्मियों को आगामी 15 दिनों के भीतर अपने-अपने ग्राम प्रधान से सत्यापित दस्तावेज प्राप्त कर यूसील प्रबंधन को जमा करना होगा।
बाघराय मार्डी ने कहा कि भविष्य में यूसील की किसी भी परियोजना या टेंडर से संबंधित रोजगार प्रक्रिया में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता दी जाएगी और ग्राम प्रधानों की भूमिका सुनिश्चित की जाएगी, ताकि वास्तविक प्रभावित परिवारों को उनका अधिकार मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि गत 1 जून को माइंस गेट के समक्ष हुए कथित असंवैधानिक धरना-प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ यूसील प्रबंधन 9 जून को कानूनी कार्रवाई करेगा। बैठक में यूसील प्रबंधन की ओर से उपमहाप्रबंधक राकेश कुमार, चंचल मन्ना एवं संजीव रंजन उपस्थित थे। वहीं झामुमो नेता बाघराय मार्डी के नेतृत्व में पांच गांवों के ग्राम प्रधान, मुखिया, आंदोलनकारी प्रतिनिधि तथा प्रत्येक गांव से चार-चार विस्थापितों ने भाग लिया। बैठक के दौरान विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा, रोजगार में पारदर्शिता और स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।








