Jamshedpur : टाटा लीज नवीनीकरण से पूर्व शहर के 18 मौजा के मूल रैयतों, खतियानधारी आदिवासी एवं मूलवासी विस्थापितों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में झारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने डुमरी विधायक एवं झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो को ज्ञापन सौंपकर मामले को विधानसभा में उठाने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि टाटा कंपनी की स्थापना के दौरान विस्थापित हुए रैयतों को अब तक समुचित पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और भूमि वापसी का लाभ नहीं मिल पाया है। मंच का आरोप है कि जमीन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज जमा किए जाने के बावजूद जिला प्रशासन ने प्रस्ताव को राज्य सरकार के भू-राजस्व विभाग को अग्रसारित नहीं किया है।
मंच ने मांग की है कि टाटा कंपनी से विस्थापित हुए 18 मौजा के खतियानधारी रैयतों का सर्वेक्षण कराया जाए तथा उन्हें विस्थापित प्रमाण पत्र जारी किया जाए। साथ ही वर्ष 2005 में हुए टाटा लीज नवीनीकरण की समीक्षा कर रैयतों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन में वर्ष 1996 के सर्वे खतियान को निरस्त कर 1908 एवं 1937 के खतियानों को मान्यता देने, लीज प्रक्रिया में छूटी हुई भूमि की पहचान कर उसे मूल रैयतों को वापस करने तथा अवैध कब्जे वाली जमीनों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी भूमि संबंधी निर्णय पर रोक लगाने की बात कही गई है।
मंच ने टाटा स्टील में नियुक्तियों के दौरान विस्थापित एवं खतियानधारी परिवारों को प्राथमिकता देने, पुनर्वास, रोजगार और आजीविका की गारंटी सुनिश्चित करने, जिला स्तरीय निगरानी समिति गठित करने तथा टाटा कंपनी के पास उपलब्ध लीज भूमि, उपयोग में लाई गई भूमि और खाली पड़ी भूमि का सार्वजनिक ब्योरा जारी करने की भी मांग उठाई है।
ज्ञापन में राज्य सरकार से एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर मूल रैयतों के दावों की जांच कराने तथा ऐतिहासिक समझौतों एवं वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानूनों के आलोक में विस्थापित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की गई है।
मंच ने विधायक जयराम महतो से आग्रह किया है कि वे इन मुद्दों को विधानसभा में प्रमुखता से उठाकर रैयतों, खतियानधारियों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।








