Jamshedpur : समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने न्यायिक सेवा भर्ती में वकालत के अनुभव से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि फैसला कानून के मेधावी स्नातकों के लिए न्यायिक सेवा में प्रवेश के रास्ते को अधिक व्यावहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने निचली न्यायपालिका में नियुक्ति से पहले पेशेवर अनुभव और प्रशिक्षण से जुड़े प्रावधानों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मई 2025 के फैसले में अदालत ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के चयन के बाद कम से कम एक वर्ष के प्रशिक्षण को अनिवार्य किया था।
सुधीर कुमार पप्पू के अनुसार, न्यायिक सेवा में प्रवेश के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण से न्यायिक अधिकारियों को अदालत की कार्यप्रणाली, वाद प्रक्रिया और न्यायिक दायित्वों की बेहतर समझ मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले प्रतिभाशाली युवाओं को न्यायिक सेवा में करियर बनाने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि वकालत के अनुभव की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से चर्चा रही है। ऐसे में प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव के बीच संतुलन बनाना न्यायिक व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए प्रावधानों से योग्य विधि स्नातकों को न्यायिक सेवा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा और न्यायपालिका को भी प्रशिक्षित एवं सक्षम युवा अधिकारी प्राप्त होंगे।
नोट: उपलब्ध आधिकारिक सुप्रीम कोर्ट रिकॉर्ड में मई 2025 के फैसले में चयन के बाद कम से कम एक वर्ष के प्रशिक्षण का स्पष्ट निर्देश मिलता है। इसलिए ऊपर की खबर में आपके मूल पाठ में दिए गए 2026 के विस्तृत संक्रमणकालीन प्रावधानों को बिना स्वतंत्र आधिकारिक आदेश के निश्चित तथ्य के रूप में नहीं दोहराया गया है।

















