Chaibasa : पश्चिम सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल चाईबासा की स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं में व्याप्त कमियों को लेकर भाजपा पिछड़ा जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री हेमंत कुमार केशरी ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने अस्पताल में डॉक्टरों की कमी, खराब चिकित्सा उपकरणों, मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता तथा आपातकालीन सेवाओं में संसाधनों की कमी जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन करीब 400 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते हैं। नए ओपीडी भवन में स्थानांतरण के बाद सुविधाएं बढ़ने की अपेक्षा थी, लेकिन व्यवस्थाएं और अधिक प्रभावित हुई हैं। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहली मंजिल तक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
उन्होंने डेंटल विभाग की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि अस्पताल में चार दंत चिकित्सक होने के बावजूद दो डेंटल चेयर में से एक पूरी तरह खराब है, जबकि दूसरी भी जर्जर अवस्था में है। पिछले लगभग दो वर्षों से डेंटल एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है, जिसके कारण मरीजों को निजी केंद्रों में अतिरिक्त खर्च कर जांच करानी पड़ रही है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अस्पताल में पहले दो अस्पताल प्रबंधक कार्यरत थे, लेकिन वर्तमान में केवल एक प्रबंधक होने से समुचित निगरानी और संचालन प्रभावित हो रहा है। वहीं भर्ती मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि निर्धारित मेन्यू के अनुरूप पौष्टिक भोजन नहीं दिया जा रहा तथा दूध और दही की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है।
आपातकालीन वार्ड की स्थिति का उल्लेख करते हुए हेमंत केशरी ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से लैस इमरजेंसी वार्ड में दोपहर 3 बजे से सुबह 9 बजे तक केवल एक चिकित्सक की ड्यूटी रहती है, जिसे भर्ती मरीजों की भी देखभाल करनी पड़ती है। इससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलने में कठिनाई हो सकती है।
भाजपा नेता ने उपायुक्त से अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त के नियमित निरीक्षण से अस्पताल की स्थिति में पहले सुधार हुआ है और जनता को उनसे काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने मरीजों के हित में सभी समस्याओं के शीघ्र समाधान की अपेक्षा जताई है।








