विधानसभा में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू की दो-टूक—तेली समाज के लिए ‘तेल व्यवसाय घानी बोर्ड’ और पंचायतों की लंबित राशि जारी करने की मांग

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Jamshedpur : झारखंड विधानसभा के शून्यकाल में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने तेली समाज, प्रजापति समाज और राज्य की पंचायत व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से इन विषयों पर तत्काल ठोस कार्रवाई करने की मांग की।

तेली समाज के पारंपरिक पेशे को बचाने की मांग – ‘तेल व्यवसाय घानी बोर्ड’ का गठन ज़रूरी

विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि तेली समाज का सदियों पुराना पारंपरिक व्यवसाय—घानी से तेल निकालना—लगभग समाप्ति की कगार पर है। आज यह पेशा जीविका का आधार नहीं रह गया है और समुदाय के अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

उन्होंने सरकार से ‘तेल व्यवसाय घानी बोर्ड’ के गठन की मांग करते हुए कहा कि इससे सरसों तेल व्यवसाय में तेली समाज को आवश्यक लाइसेंस आसानी से उपलब्ध होंगे। बोर्ड की स्थापना से तेली समुदाय की आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। परंपरागत कौशल और विरासत को संरक्षण मिलेगा।


माटी कला बोर्ड को पुनः सक्रिय करने की मांग

श्रीमती साहू ने पूर्ववर्ती भाजपा शासन के दौरान गठित माटी कला बोर्ड को फिर से सक्रिय करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस बोर्ड से प्रजापति समाज को प्रत्यक्ष लाभ मिलता था, लेकिन वर्तमान में बोर्ड निष्क्रिय अवस्था में है। इसे पुनः सक्रिय कर राज्य के मिट्टी–शिल्पकारों को दोबारा आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान की जानी चाहिए। पंचायतों की जर्जर वित्तीय स्थिति पर गंभीर चिंता—लंबित राशि जारी करने की अपील

विधायक ने जोर देकर कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से उन्हें आवंटित राशि जारी न होने के कारण सभी विकास कार्य ठप पड़े हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की कि राज्य वित्त आयोग की लंबित राशि तुरंत जारी की जाए, ताकि गांवों का अटका विकास फिर से पटरी पर लौट सके। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज आज भी उतना ही प्रासंगिक है, और पंचायतों को मज़बूत किए बिना ग्रामीण समृद्धि संभव नहीं।

जनप्रतिनिधियों के लिए सुरक्षा व उचित मुआवजे की मांग

साहू ने सदन में यह भी कहा कि कार्यकाल के दौरान जनप्रतिनिधियों की आकस्मिक मृत्यु या गंभीर दुर्घटना की स्थिति में राज्य सरकार को उचित मुआवजा देने की स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए।

मुखियाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की मांग—केरल मॉडल का हवाला

केरल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड में मुखियाओं को कम से कम ₹30,000 मासिक मानदेय दिया जाना चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपने दायित्वों का निर्वाह कर सकें।

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