हिदायतुल्लाह खान की पहल का असर: केंद्र ने अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर शुरू की कार्रवाई

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Ranchi : झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान की पहल अब रंग लाती दिखाई दे रही है। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के समक्ष उनके द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र सरकार ने सक्रियता दिखाते हुए संबंधित विभागों और संस्थानों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इससे झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय में नई उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित कई मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय सामने आ सकता है।

नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय बैठक के दौरान हिदायतुल्लाह खान ने झारखंड समेत देशभर के अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े विभिन्न विषयों को मजबूती से उठाया था। उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, विकास योजनाओं और संवैधानिक अधिकारों से संबंधित कई मांगें रखी थीं।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 11 जून 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) के माध्यम से संबंधित विभागों को इन मांगों पर कार्रवाई करने और उसकी प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग को भी सीधे सूचित करने को कहा है।

सबसे प्रमुख मांगों में कोविड-19 के बाद से बंद रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे से जेद्दा (सऊदी अरब) के लिए हज उड़ानों को पुनः शुरू करने का मुद्दा शामिल है। वर्तमान में झारखंड के हज यात्रियों को कोलकाता के माध्यम से यात्रा करनी पड़ती है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ और असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। यदि इस दिशा में सकारात्मक निर्णय होता है तो हजारों हज यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

इसके अलावा, सीबीएसई स्कूलों में कक्षा 6 से 10 तक उर्दू भाषी विद्यार्थियों के लिए उर्दू को तृतीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई थी। मंत्रालय द्वारा संबंधित विभागों को पत्र भेजे जाने के बाद इस दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।

हिदायतुल्लाह खान ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के अंतर्गत अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में किए गए विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने तथा बजट उपयोग की समीक्षा की भी मांग की थी। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

ज्ञापन में प्रधानमंत्री के नवीन 15 सूत्री कार्यक्रम की राज्य स्तरीय निगरानी समितियों के प्रभावी संचालन और नियमों के अनुपालन के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अल्पसंख्यकों के लिए संचालित योजनाओं की निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

उन्होंने विभिन्न राज्यों में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों के घरों, दुकानों और धार्मिक स्थलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन की मांग की। इस संबंध में भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा संचालित विद्यालयों को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग को भी केंद्र के समक्ष रखा गया है। इसके साथ ही संविधान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का हवाला देते हुए विद्यार्थियों को हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू तथा अन्य मातृभाषाओं में शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार की प्रभावी गारंटी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम को झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मांगों को उठाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अल्पसंख्यकों को उनके संवैधानिक अधिकार, शिक्षा के अवसर और धार्मिक स्वतंत्रता का पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार और संबंधित विभाग सकारात्मक कदम उठाएंगे, जिससे आने वाले समय में झारखंड के लाखों अल्पसंख्यक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल सरकारी पत्राचार तक सीमित नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदाय के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके सकारात्मक परिणाम जल्द देखने को मिल सकते हैं।

Leave a Comment

The specified slider id does not exist.