Jamshedpur : भारतीय जननाट्य संघ (इप्टा), जमशेदपुर द्वारा ट्राइबल कल्चर सेंटर में आयोजित सात दिवसीय बाल रंग महोत्सव का समापन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रभावशाली नाट्य मंचन के साथ हुआ। समापन समारोह में बच्चों ने प्रसिद्ध व्यंग्यकार और कहानीकार हरिशंकर परसाई की चर्चित कहानी ‘उखड़े खंभे’ के नाट्य रूपांतरण का जीवंत मंचन कर दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
नाटक के माध्यम से बच्चों ने भ्रष्टाचार, मुनाफाखोरी और व्यवस्था की खामियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया। दशकों पहले लिखी गई परसाई की रचना आज भी समाज की वास्तविकताओं को उजागर करती नजर आई। बच्चों की प्रस्तुति में यह संदेश भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि बदलाव और बेहतर समाज की उम्मीद अभी भी जिंदा है।
संवाद और अभिनय ने जीता दर्शकों का दिल
बाल कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद अदायगी और कर्णप्रिय संगीत के जरिए सैकड़ों दर्शकों का मन मोह लिया। प्रस्तुति के दौरान कई दृश्य ऐसे रहे, जिन पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य ‘नाचा’ शैली में हुई, जिसे प्रसिद्ध रंगकर्मी और निर्देशक निसार अली, पार्थ बनर्जी, श्वेता गुप्ता और उनके साथियों ने प्रस्तुत किया। इसके बाद बाल कलाकारों ने मुख्य नाटक को आगे बढ़ाते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

नाटक बच्चों को बनाता है संवेदनशील नागरिक : प्रो. अहमद बद्र
समारोह को संबोधित करते हुए इप्टा जमशेदपुर के अध्यक्ष प्रो. अहमद बद्र ने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की एक महत्वपूर्ण विधा है। उन्होंने कहा कि बचपन से ही बच्चों को रंगमंच से जोड़ने से उनमें सामाजिक संवेदनशीलता विकसित होती है और वे जीवन में सकारात्मक दिशा की ओर अग्रसर होते हैं।
मोबाइल की लत पर भी किया कटाक्ष
कार्यक्रम के दौरान हास्य-व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘पापी हो गये नैना’ का मंचन भी किया गया। इस प्रस्तुति के जरिए मोबाइल फोन में डूबती नई पीढ़ी की बदलती जीवनशैली और उसके प्रभावों को रोचक अंदाज में दर्शाया गया। इसके अलावा बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी कला का परिचय दिया।
24 बाल कलाकार हुए सम्मानित
समापन समारोह में बाल रंग शिविर में भाग लेने वाले 24 बाल कलाकारों को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में इप्टा की अर्पिता, वरिष्ठ रंगकर्मी शांति जी, कामरेड शशि जी, डॉ. एस. के. झा, साहित्यकार रणेंद्र, जकारिया, मिथिलेश सहित जमशेदपुर, रांची, हजारीबाग, डाल्टेनगंज और घाटशिला से आए सैकड़ों कलाकार एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संजय सोलोमन और अर्पिता ने किया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष बाल रंग शिविर का आयोजन प्रसिद्ध फिल्मकार, लेखक और पत्रकार ख्वाजा अहमद अब्बास की स्मृति को समर्पित किया गया था। बाल कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि रंगमंच केवल कला का मंच नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और बदलाव का सशक्त माध्यम भी है।








