सूर्य सिंह बेसरा घाटशिला उपचुनाव नहीं लड़ेंगे, झारखंड पीपुल्स पार्टी रहेगी तटस्थ

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Jamshedpur : झारखंड की राजनीति में अहम स्थान रखने वाले पूर्व विधायक एवं झारखंड आंदोलनकारी सूर्य सिंह बेसरा ने रविवार को स्पष्ट किया कि वे घाटशिला उपचुनाव नहीं लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि उनकी पार्टी झारखंड पीपुल्स पार्टी (जेपीपी) भी इस उपचुनाव में किसी उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारेगी और पूरी तरह तटस्थ रहेगी।

बेसरा ने कहा कि झारखंड राज्य निर्माण के मूल मुद्दों को लेकर पार्टी का रुख स्पष्ट है। उन्होंने तीन प्रमुख शर्तें रखीं—
झारखंड आंदोलनकारी चिन्हीकरण आयोग का पुनर्गठन हो।
आंदोलनकारियों का नौ माह का पेंशन बकाया तुरंत भुगतान किया जाए।
संताल विश्वविद्यालय, लेदा (दामपाड़ा) को स्वीकृति दी जाए।

उन्होंने कहा कि “घाटशिला मेरा राजनीतिक जीवन का आधारशिला रहा है। यहीं से मेरे छात्र राजनीति और झारखंड आंदोलन की शुरुआत हुई थी। 1977 में मैंने घाटशिला कॉलेज से छात्र जीवन शुरू किया और 1980 में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पहली बार मुसाबनी में मंच प्रदान किया था।”

बेसरा ने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि 1985 में झामुमो के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा, 1990 में विधायक बने, और 1999 में झारखंड राज्य गठन के मुद्दे पर इस्तीफा देकर इतिहास रचा। उन्होंने कहा, “घाटशिला में हमने टीकाराम मांझी (सीपीआई) और डॉ. अजय कुमार का समर्थन कर उन्हें विजयी बनाया था। इस बार भी हम किसी के पक्ष या विपक्ष में नहीं रहेंगे, बल्कि जनहित के मुद्दों पर तटस्थ रहेंगे।”

झारखंड पीपुल्स पार्टी के इस रुख के बाद घाटशिला उपचुनाव का राजनीतिक समीकरण दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।

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