Jamshedpur : डिमना इलाके में एनएच-33 के किनारे स्थित कचरा डंपिंग यार्ड आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से यहां कचरा जमा किए जाने के कारण इलाके में तेज दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। इससे परेशान होकर लोगों ने अब विरोध का रास्ता अपनाते हुए डंपिंग यार्ड के प्रवेश द्वार को बंद कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
दुर्गंध से घरों में रहना हुआ मुश्किल
स्थानीय निवासियों के अनुसार, डंपिंग यार्ड से उठने वाली तेज बदबू आसपास की बस्तियों और रिहायशी इलाकों तक फैलती है। लोगों का कहना है कि दुर्गंध इतनी तीव्र होती है कि घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बावजूद राहत नहीं मिलती। इससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों ने कचरे से निकलने वाले गंदे पानी के जमीन में रिसने से आसपास के जलस्रोतों और भूजल के दूषित होने की आशंका भी जताई है। हालांकि, इस आशंका की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग द्वारा जांच कराना आवश्यक है।
खेलकूद की जमीन से डंपिंग यार्ड तक का सफर
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जमीन का इस्तेमाल पहले खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए किया जाता था, वहां आधुनिक बस अड्डा बनाए जाने की उम्मीद जताई गई थी। लोगों को आशा थी कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और स्थानीय निवासियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन समय के साथ यह जमीन कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील हो गई।
लोगों का आरोप है कि लगातार कचरा जमा होने से आसपास के निवासियों की परेशानी बढ़ती जा रही है, जबकि समस्या के समाधान को लेकर अब तक उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली है।
प्रवेश द्वार बंद कर कचरा वाहनों को रोकने की कोशिश
लगातार बढ़ती दुर्गंध और कथित प्रदूषण से नाराज स्थानीय लोगों ने पिछले कुछ दिनों से डंपिंग यार्ड के प्रवेश द्वार पर पहरा देना शुरू कर दिया है। वे कचरा लेकर आने वाले वाहनों को यार्ड में प्रवेश करने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे का उचित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बिना स्थायी व्यवस्था के लगातार कचरा जमा किए जाने से आसपास के लोगों की मुश्किलें बढ़ती रहेंगी।
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
डिमना के स्थानीय निवासियों ने संबंधित प्रशासन और नगर निकाय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मांग है कि डंपिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध को नियंत्रित करने, कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने और गंदे पानी के संभावित प्रभाव की जांच कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
फिलहाल, डंपिंग यार्ड के विरोध में स्थानीय लोगों की ओर से प्रवेश द्वार बंद किए जाने का मामला चर्चा में है। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी लोगों की शिकायतों का समाधान करने और क्षेत्र को दुर्गंध एवं संभावित प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
















