Chainasa : Manoharpur के सारंडा क्षेत्र से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 12 वर्षीय एक बालक ब्रेन मलेरिया से जूझता रहा, लेकिन इलाज की जगह अंधविश्वास का सहारा लिया गया, जिससे उसकी हालत और गंभीर हो गई।
जानकारी के अनुसार, बालक गंगादा पंचायत के चुरगी गांव का निवासी है। तीन दिन पहले तेज बुखार आने पर उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराया गया। हालत बिगड़ने पर अंधविश्वास के चलते बालक के माथे पर गर्म हँसुआ से दाग दिया गया, जिससे उसकी स्थिति और बिगड़ गई।
गंभीर अवस्था में शुक्रवार सुबह उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए बेहतर इलाज के लिए Rourkela रेफर कर दिया।
बताया जा रहा है कि बालक के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है और उसकी देखभाल उसकी वृद्ध दादी कर रही हैं। आर्थिक तंगी और जागरूकता के अभाव में समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण स्थिति गंभीर होती गई।
शुरुआत में परिजन इलाज के लिए असमर्थ थे, लेकिन स्थानीय लोगों की पहल पर 108 एम्बुलेंस की मदद से बच्चे को राउरकेला सरकारी अस्पताल भेजा गया।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करती है, जहां समय पर चिकित्सा न मिलने से मासूमों की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है।











