Jadugoda: पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र अंतर्गत भाटीन गांव में आदिवासी युवाओं ने रविवार को पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ शिकार पर्व मनाया। इस अवसर पर युवाओं ने अपने पारंपरिक हथियारों के साथ सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन किया और समुदाय की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया।
पर्व की शुरुआत गांव के नायके द्वारा मरांग बुरु की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। पूजा के दौरान ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से सुरक्षा, अच्छी वर्षा, बेहतर फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
ग्रामीणों ने बताया कि शिकार पर्व आदिवासी समाज की प्राचीन परंपराओं में से एक है, जो आदिम काल से चली आ रही है। वर्तमान समय में इस पर्व का उद्देश्य शिकार करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ना है।
ग्रामीणों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के बीच अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखना बेहद जरूरी है। शिकार पर्व जैसे आयोजन युवाओं को अपने इतिहास और परंपराओं के प्रति जागरूक करने का माध्यम बन रहे हैं।
पर्व के दौरान युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों के साथ सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शिकार पर्व के माध्यम से आदिवासी समुदाय ने प्रकृति, कृषि और सामुदायिक जीवन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए आने वाले कृषि सीजन के लिए अच्छी बारिश और भरपूर फसल की कामना की। कार्यक्रम में गांव के बुजुर्गों, युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही।









