Adityapur : जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत आसंगी गांव में सरकारी जमीन को आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के नाम हस्तांतरित किए जाने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। शनिवार को जगन्नाथ मंदिर परिसर में आयोजित बैठक के बाद ग्रामीणों ने प्रेसवार्ता कर उपायुक्त के आदेश को वापस लेने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, मौजा आसंगी के खाता संख्या-342 एवं प्लॉट संख्या-276 की 4.42 एकड़ सरकारी जमीन पर पिछले तीन वर्षों से छह गांवों के सहयोग से भव्य जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। उनका आरोप है कि बिना ग्रामसभा की सहमति के इसी जमीन के 2.22 एकड़ हिस्से को आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए प्रस्तावित 500 बेड के छात्रावास के निर्माण हेतु जियाडा के नाम हस्तांतरित कर दिया गया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्हें औद्योगिक विकास से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़ी भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा। उनका कहना है कि मंदिर परिसर से जुड़ी इस जमीन का सामाजिक और धार्मिक महत्व है, इसलिए प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
प्रेसवार्ता के दौरान ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि प्रस्तावित छात्रावास से निकलने वाला सीवेज आसपास स्थित लगभग नौ एकड़ के तालाब को प्रदूषित कर सकता है। उनका कहना है कि यह तालाब क्षेत्र का एकमात्र प्रमुख जलस्रोत है, जिसका उपयोग ग्रामीण दैनिक जरूरतों, पशुपालन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए करते हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पूर्व में औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले क्षेत्र को अपेक्षित मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने प्रशासन से जियाडा के नाम किए गए भूमि हस्तांतरण के आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस मामले में जिला प्रशासन एवं जियाडा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।









