धारा 144 हटने के बाद फिर गरमाया कपाली भूमि विवाद, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम

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Chandil : चांडिल थाना अंतर्गत कपाली ओपी क्षेत्र के पुड़िसिली गांव स्थित खाता संख्या 166, प्लॉट संख्या 352 की लगभग 80 डिसमिल भूमि को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अनुमंडल दंडाधिकारी, चांडिल द्वारा विवादित भूमि पर पूर्व में लागू की गई धारा 144/163 की निषेधाज्ञा समाप्त किए जाने के बाद दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब बिजली सिंह ने उक्त भूमि पर अपना वैधानिक अधिकार होने का दावा किया था। उनका कहना था कि भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेखों में उनके पूर्वजों का नाम दर्ज है तथा उन्हें उनके हिस्से के अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मामले में निष्पक्ष जांच और न्यायसंगत कार्रवाई की मांग की थी।

वहीं दूसरे पक्ष के गौर सिंह ने शुरू से ही भूमि पर अपना वैध अधिकार होने का दावा किया है। उनका कहना है कि उन्हें किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्माण कार्य रोकने संबंधी कोई आदेश या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था और वे अपने वैधानिक अधिकार के तहत भूमि का उपयोग कर रहे हैं।

मामला अनुमंडल दंडाधिकारी, चांडिल के न्यायालय में पहुंचने पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रथम पक्ष की ओर से खतियान, वंशावली एवं ग्रामसभा बैठक से संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए गए, जबकि विपक्षी पक्ष ने खतियान, लगान रसीद, वंशावली और अन्य दस्तावेजों के आधार पर भूमि पर अपना दावा पेश किया।

न्यायालय के अभिलेखों के अनुसार दोनों पक्ष भूमि पर स्वामित्व का दावा कर रहे थे। साथ ही अंचल अधिकारी, चांडिल की जांच रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में किसी एक पक्ष के पक्ष में निर्णय देना संभव नहीं पाया गया। परिणामस्वरूप विवादित भूमि पर लागू धारा 144/163 की निषेधाज्ञा समाप्त कर दी गई तथा संबंधित कार्यवाही बंद कर अभिलेख निष्पादित कर दिया गया।

हालांकि निषेधाज्ञा हटने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। बिजली सिंह के नाती लालटू सिंह का आरोप है कि उन्हें 26 मई को उपस्थित होने के लिए कहा गया था, जबकि उनके अनुसार 25 मई को ही निषेधाज्ञा समाप्त कर दी गई। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद का मूल प्रश्न अब भी अनसुलझा है और उनकी ओर से संतुष्टि अथवा असंतुष्टि के संबंध में कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका परिवार अब सिविल न्यायालय में स्वत्व वाद दायर कर कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

दूसरी ओर गौर सिंह का कहना है कि धारा 144 हटने के बाद भूमि पर कार्य कराए जाने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निषेधाज्ञा प्रभावी नहीं है, इसलिए वे अपने हिस्से की भूमि पर निर्माण कार्य करा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति का वैध अधिकार दस्तावेजों के आधार पर सिद्ध होता है तो उसका सम्मान किया जाएगा।

इधर, धारा 144 समाप्त होने के बाद गौर सिंह के घर का निर्माण कार्य जारी है। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि भविष्य में किसी प्रकार के तनाव या विधि-व्यवस्था की समस्या से बचने के लिए राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत जांच आवश्यक है। ग्रामीणों और सामाजिक लोगों ने भी मामले के निष्पक्ष समाधान की मांग की है।

फिलहाल विवादित भूमि पर स्वामित्व और अधिकार का अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम सिविल न्यायालय तथा राजस्व अभिलेखों के आधार पर ही होना बाकी है। धारा 144 हटने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और अब पूरे मामले पर क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

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