चाईबासा के पिल्लई हॉल में शारदा संगीतालय का वार्षिकोत्सव ‘पंखुड़ी 26’ उत्साह और सांस्कृतिक उमंग के बीच सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में संगीतालय के बच्चों ने गायन, वादन, नृत्य और कला की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि नितिन प्रकाश, विशिष्ट अतिथि पंडित सतीश शर्मा, राम अवतार अग्रवाल, गुरमुख सिंह खोखर, राजीव कुमार और डॉ. मानोशी सातरा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर नितिन प्रकाश ने कहा कि शारदा संगीतालय कम समय में ही शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और यहां के बच्चे भविष्य के सांस्कृतिक दूत हैं।

संस्था के निदेशक मानस रॉय ने कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि संगीतालय की प्रगति में शिक्षकों, सदस्यों और अभिभावकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने शहर के सांस्कृतिक वातावरण को सशक्त बनाने में सभी की भूमिका की सराहना की।

कार्यक्रम की शुरुआत महान गायिका आशा भोसले को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए “दो लफ्जों की है दिल की कहानी” गीत से हुई। इसके बाद छात्रों ने इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक की आकर्षक प्रस्तुति दी। छोटे बच्चों द्वारा “चिट्ठी आई है” गीत की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कथक नृत्य के माध्यम से गुरु वंदना भी प्रस्तुत की गई, जिसे खूब सराहा गया।
कार्यक्रम में छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसमें गायन, वादन, नृत्य और चित्रकला की विविध प्रस्तुतियां शामिल रहीं।
कार्यक्रम में गया घराने के प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतज्ञ पंडित सतीश शर्मा को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। गायन में श्रेष्ठ विद्यार्थी सम्मान 2025-26 दैविक दत्ता और त्रिशा सिंह को मिला।

गिटार में अर्पिता दे, मॉडर्न डांस में यश सिंह, अदिति सुंडी और तोशानी सेनगुप्ता, कथक में आराध्या रॉय, सिंथेसाइजर में अर्णव हेंब्रम, ड्राइंग में नैतिक कुमार और अमृता कुमारी को पुरस्कृत किया गया। वहीं बेस्ट सपोर्टिंग स्टूडेंट के रूप में शिबू लियांगी और श्रीजीव गिरी को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अभिभावकों की टीम—पीयाली सरकार, अपराजिता सिंह, जांबी लियांगी और रूपा आचार्जी—का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन में शिक्षक देवाशीष चटर्जी, प्रणब दरिपा, देबोजीत राय, आशीष सिन्हा, शुभांकर घोष, मुनमुन बोस, पार्थों सेनगुप्ता, विवेक सिन्हा, स्निग्धा दे, सौरभी दत्ता, दीपेश गोप और नेहा बोस की सक्रिय भूमिका रही।
मंच संचालन रमेश दास और जया दुबे ने किया, जबकि अंत में निदेशक मानस रॉय ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।











