चाय फेंकने से झुलसी पीड़िता से इलाज के पैसे मांगना गैरकानूनी: अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने उपायुक्त से हस्तक्षेप की मांग की

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Jamshedpur : जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में हुई चाय फेंकने की घटना ने अब कानूनी और मानवीय दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना में झुलसी पीड़िता मेंहदी का इलाज टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) में चल रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा इलाज के एवज में परिजनों से पैसे मांगे जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

वरीय अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने इस पूरे प्रकरण को “सरासर गैरकानूनी” बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि ऐसे मामलों में कानून स्पष्ट रूप से पीड़ित को मुफ्त इलाज का अधिकार देता है।

अधिवक्ता के अनुसार, इस मामले में दर्ज प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता 2023 की विभिन्न धाराओं—118(2), 109, 352, 351(2), 74 और 3(5)—के तहत की गई है। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति पर ज्वलनशील पदार्थ या गर्म तरल फेंकने से चेहरे या शरीर पर विकृति होती है, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 397 तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357C के तहत पीड़ित को सरकारी और निजी—दोनों अस्पतालों में निःशुल्क इलाज मिलना अनिवार्य है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब कानून इतना स्पष्ट है, तब अस्पताल प्रबंधन द्वारा पैसे मांगना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि यह सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन भी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता पप्पू ने उपायुक्त से तत्काल संज्ञान लेने और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह मामला व्यापक जनआक्रोश का रूप ले सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या निजी अस्पताल आपात और संवेदनशील मामलों में अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं या नहीं। पीड़िता के परिजन फिलहाल न्याय और राहत—दोनों की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

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