टाटा स्टील फाउंडेशन ने गम्हरिया में आयोजित किया दस दिवसीय मोतियाबिंद जाँच और शल्य चिकित्सा शिविर

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Jamshedpur:कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत टाटा स्टील फाउंडेशन ने अपने जन स्वास्थ्य पहल के अंतर्गत गम्हरिया में 27 अक्टूबर से 8 नवंबर तक दस दिवसीय मोतियाबिंद जाँच और शल्य चिकित्सा शिविर का सफल आयोजन किया। यह शिविर शंकर नेत्रालय के साथ तकनीकी साझेदारी और संथाल सरना उमुल, गम्हरिया के साथ सामाजिक सहयोग में संपन्न हुआ।

इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित समुदायों को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण नेत्र देखभाल सेवाएँ उपलब्ध कराना था — जिसमें प्रारंभिक जांच से लेकर निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी तक की संपूर्ण प्रक्रिया शामिल रही। शिविर का आयोजन खैरवाल समथा जोरहारगढ़ समिति, कालिकापुर के प्रांगण में हुआ, जिसे सामुदायिक योगदान के रूप में नि:शुल्क प्रदान किया गया।

शिविर के पूर्व, फाउंडेशन की टीम ने दो सप्ताह तक व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया। गाँवों में मोबाइल वैन द्वारा दौरे, स्कूलों में पम्फलेट वितरण, नुक्कड़ नाटक और त्योहारों के अवसर पर लोगों से सीधा संवाद जैसी गतिविधियों के माध्यम से सैकड़ों लोगों को इस पहल से जोड़ा गया। युवा नेतृत्व कार्यक्रम (YLP) के प्रतिभागियों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।

कार्यक्रम को स्थानीय समुदाय से शानदार प्रतिसाद मिला। कुल 558 व्यक्तियों (306 पुरुष व 252 महिलाएँ) की जाँच की गई, जिनमें से 113 मरीजों को सर्जरी हेतु चिन्हित किया गया। चिकित्सकों द्वारा 4 से 8 नवंबर तक किए गए सर्जरी सत्र में 128 लाभार्थियों की मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक की गई।

विशेष रूप से सुसज्जित, वातानुकूलित मोबाइल ऑपरेशन थिएटर (OT) शिविर की सबसे बड़ी खासियत रही, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास साकार हुआ। सर्जरी के बाद मरीजों को आवश्यक दवाइयाँ और फॉलो-अप जांच सेवाएँ भी उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में उपस्थित ग्रामीणों ने टाटा स्टील फाउंडेशन और चिकित्सक दल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहलें न केवल दृष्टि बहाल करती हैं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास भी जगाती हैं।

इस अवसर पर फाउंडेशन की टीम नेत्र स्वास्थ्य पर जागरूकता सत्र भी आयोजित कर रही है, जिसमें नियमित जांच, स्वच्छता और प्रारंभिक लक्षणों की पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला गया। गम्हरिया ब्लॉक के अलावा सरायकेला और आसपास के गाँवों से भी बड़ी संख्या में लोग इस पहल से लाभान्वित हुए।

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