सवर्ण समाज की हालत चिंताजनक, राजनीतिक और संवैधानिक उपेक्षा के शिकार : डी. डी. त्रिपाठी

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Jamshedpur : भारतीय लोकतंत्र में सवर्ण समाज की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है और यह केवल चिंतन का नहीं, बल्कि गंभीर चिंता का विषय बन गया है। यह टिप्पणी सवर्ण महासंघ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी. डी. त्रिपाठी ने शुक्रवार को जमशेदपुर में एक प्रेस वार्ता के दौरान की।



श्री त्रिपाठी ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में भले ही कोई यह मानने को तैयार न हो, परंतु सच्चाई यही है कि सवर्ण समाज आज राजनीतिक और संवैधानिक रूप से दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है।



उन्होंने कहा, “एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद इस सिद्धांत पर टिकी होती है कि सभी वर्गों को राजनीतिक भागीदारी समान रूप से मिले। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सवर्ण समाज इस अधिकार से वंचित है, जबकि ओबीसी, एससी, एसटी और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को सभी दलों ने प्रमुखता दी है।”



आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर चिंता जताते हुए श्री त्रिपाठी ने वर्ष 2013 के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा:

49% सवर्ण बच्चे गरीबी के कारण पढ़ाई अधूरी छोड़ देते हैं,

36% सवर्ण परिवार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं,

45% के पास पक्का मकान नहीं है,

90% युवा स्नातक डिग्री तक नहीं पहुंच पाते,

45% पलायन, जबकि

65% को रोजगार हेतु घर छोड़ना पड़ता है,

और 55% सवर्णों के पास एक एकड़ से भी कम कृषि भूमि है।


उन्होंने कहा कि “अब समय आ गया है कि सवर्ण समाज अपनी ‘कुंभकर्णी नींद’ से जागे और अपने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हो।” प्रेस वार्ता में संस्था के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार सिंह, जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार उपाध्याय, और अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

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