पितृपक्ष के अंतिम दिन अपने पूर्वजों को तर्पण करने के लिए गंगा तट पर पहुंचे लोग

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साहिबगंज: सनातन धर्म में आश्विन मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक 15 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष का अति महत्व का वर्णन है। जहां शास्त्रों के अनुसार इन दिनों पितरों की आत्मा पृथ्वी पर नदी तट पर आकर विचरण करती हैं इसलिए इन दिनों लोग अपने अपने पितरों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष प्रदान के निमित्त जल तर्पण करते हैं। इसको लेकर पंडित प्रमोद पांडे ने कहा कि गरुड़ पुराण में ऐसा वर्णन है कि जल का तर्पण करने से पितरों की आत्माएं तृप्त होती है और इससे परिवार में कल्याण एवं सुख शांति आती है और पितरों की आत्मा भी तृप्त होती है। उधर पितृपक्ष के अंतिम दिन अमावस्या को मुक्तेश्वर धाम सीढ़ी गंगा घाट, नमामि गंगे घाट, शकुंतला घाट, लंच घाट, कबूतरखोपी चानन घाट, सूर्यदेव घाट, पुरानी साहिबगंज गंगा घाट सहित विभिन्न गंगा घाटों में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंड दान व तर्पण करने के लिए भारी संख्या में लोग गंगा किनारे पहुंचे। जहां इस दौरान विधि विधान से पुरोहितों के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण कराते हुए लोगों ने पिंड दान व जल तर्पण किया। वही यह जल तर्पण सिर्फ पुत्र ही नहीं बल्कि पुत्री ने भी अपने पितरों को जल तर्पण किया।

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