Public Hearing : झारखंड के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर एनसीएसटी सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने जताई नाराजगी

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Jamshedpur : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने झारखंड के अधिकारियों द्वारा आयोग के समक्ष निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं होने पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। यह मामला रांची स्थित सिरमटोली-मेकन फ्लाईओवर के रैंप से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर आदिवासी समाज की ओर से आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई थी।

आयोग की ओर से पथ निर्माण विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार, रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री और नगर निगम के प्रशासक संदीप सिंह को 29 मई को नई दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय में उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया था। लेकिन तय तारीख को कोई भी अधिकारी आयोग कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ।

प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग सुनील कुमार ने ई-मेल के माध्यम से 28 मई को अपनी अनुपस्थिति की सूचना देते हुए पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों का हवाला दिया। उन्होंने 16वें वित्त आयोग से जुड़े कार्यक्रमों, राज्य की वित्तीय स्थिति की समीक्षा, एसडीजी वर्कशॉप और हाई कोर्ट निर्देशों का हवाला देते हुए आयोग के समक्ष पेशी से छूट मांगी थी।

इस पर डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि “राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एक संवैधानिक संस्था है और झारखंड के अधिकारियों को इसकी मर्यादा समझनी चाहिए। आयोग ने पहले ही 13 मई को बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया था, जिसे राज्य सरकार ने 12 मई को असमर्थता जाहिर कर रद्द कर दिया था।”

उन्होंने आगे कहा कि आयोग की ओर से 28 मई को ही आदिवासी समाज के लोग दिल्ली बुलाए गए थे, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। “जब मैंने आयोग की सदस्यता ग्रहण की थी, उस समय झारखंड से संबंधित मामलों की संख्या 350 के आसपास थी, जो अब 1300 से अधिक हो चुकी है। यह इस बात का संकेत है कि अधिकारी आदिवासी समाज की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।”

निरीक्षण और अगली कार्रवाई की तिथि तय

आयोग की टीम अब 3 जून, सुबह 10 बजे सिरमटोली-मेकन फ्लाईओवर स्थल का निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण विभाग, नगर विकास विभाग, जनजातीय कल्याण विभाग, उपायुक्त और नगर निगम के प्रशासक को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। निरीक्षण के पश्चात आयोग की टीम मुख्य सचिव और विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक करेगी।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मांगी गई सूचनाएं अंतरविभागीय प्रकृति की हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारियों को आयोग के समक्ष उपस्थित होना चाहिए था। आयोग अब 10 जून के बाद की नई तिथि तय करेगा, जिसमें संबंधित सभी विभागों से समन्वित जानकारी की समीक्षा की जाएगी।

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