Jamshedpur : झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आरटीआई एक्टिविस्ट Kritivas Mandal ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu और प्रधानमंत्री Narendra Modi के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
कृतिवास मंडल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार द्वारा सूचना आयुक्तों के चयन में Right to Information Act 2005 और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों, विशेषकर प्रेस प्रवक्ताओं के नामों को इस संवैधानिक पद के लिए आगे बढ़ाया जाना, सूचना आयोग की निष्पक्षता और उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।
मंडल ने अपने पत्र में मांग की है कि मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर केवल उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए, ताकि आम नागरिकों को न्याय मिल सके।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि सूचना आयुक्तों के पदों पर नियुक्ति के लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाए।
मंडल ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी आवेदक का अन्य लाभ के पद पर होना या किसी व्यवसाय से जुड़ा होना नियमों के विरुद्ध है।
इस पूरे मामले को पारदर्शी बनाने के लिए कृतिवास मंडल ने मांग की है कि चयनित उम्मीदवारों की संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) से कराई जाए और उनकी संपत्ति सार्वजनिक की जाए।
मंडल ने वर्तमान में चयनित नामों को तत्काल निरस्त करने और सूचना आयुक्त पदों के लिए नई विज्ञप्ति जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी, मेरिट आधारित और इंटरव्यू आधारित बनाने पर जोर दिया, ताकि निष्पक्ष और योग्य व्यक्तियों को समान अवसर मिल सके।
यह मामला अब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है, ऐसे में आने वाले समय में इस पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।











