11 साल से बदहाल NH-33 लिंक रोड पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, बोले—“सड़क दो या आंदोलन झेलो”

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Jamshedpur : Jamshedpur के ग्रामीण इलाकों में विकास के दावों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पूर्वी सिंहभूम जिले के MGM थाना क्षेत्र में NH-33 से जुड़ी देवघर पंचायत भवन से केंदाडीह होते हुए ईंदलबेड़ा स्थित आर.वी.एस. कॉलेज तक जाने वाली करीब 2.7 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले 11 वर्षों से बदहाली का शिकार है।

वर्ष 2011 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी यह सड़क आज “मौत का रास्ता” बन चुकी है। जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी परतें और कीचड़ से भरे हिस्से इस मार्ग को खतरनाक बना रहे हैं।


बरसात में यह सड़क तालाब में तब्दील हो जाती है, जबकि गर्मी और सर्दी में धूल और गड्ढों का जाल लोगों की जान जोखिम में डाल देता है। यह रास्ता न केवल ग्रामीणों के लिए, बल्कि सैकड़ों स्कूली बच्चों, कॉलेज छात्रों, शिक्षकों और पंचायत कर्मियों के लिए रोज़ की चुनौती बन गया है।

ईंदलबेड़ा स्थित आर.वी.एस. कॉलेज, उत्क्रमित उच्च विद्यालय और पंचायत सचिवालय तक पहुंचने का यही एकमात्र प्रमुख मार्ग है।


ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की बदहाली के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।

दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं

कई लोग गंभीर चोटों का शिकार हो चुके हैं

एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती

यह सड़क अब सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का पर्याय बन चुकी है।


ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर हर स्तर पर आवाज उठाई।
उपायुक्त (DC), सांसद, विधायक से लेकर राष्ट्रपति तक लिखित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

देवघर पंचायत के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सड़क क्षेत्र की जीवनरेखा है। इसकी खराब हालत से—

शिक्षा प्रभावित हो रही है

स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हैं

रोजगार और दैनिक जीवन ठप पड़ रहा है

बिरसा मुंडा खेल एवं सामाजिक विकास संस्थान समेत कई संगठनों ने भी इसे जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।


लगातार अनदेखी से नाराज़ ग्रामीण अब खुलकर विरोध की राह पर हैं। उनका साफ कहना है—

“हमने हर दरवाजा खटखटाया, अब सड़क पर उतरेंगे।”
“यह सड़क नहीं, हमारी रोज़ की परीक्षा है।”
“अब और इंतजार नहीं, समाधान चाहिए।”


ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

यह मामला अब सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि जनजीवन और सुरक्षा का सवाल बन चुका है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जनाक्रोश बड़े आंदोलन में बदल सकता है।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि Jharkhand सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता देगी और जल्द ही इस सड़क के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू कराएगी।

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