दहेज हत्या मामले में सबूतों के अभाव में आरोपी बरी, जमशेदपुर कोर्ट का फैसला

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Jamshedpur : जमशेदपुर में चर्चित दहेज हत्या मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी सोनू कुशवाहा को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ ठोस और निर्णायक साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा।

यह मामला 4 सितंबर 2021 का है, जब सुषमा कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद मृतका के पिता, गोविंदपुर (गढ़ड़ा) निवासी राज नारायण कुशवाहा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी बेटी को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और अंततः उसकी हत्या कर दी गई।

परिजनों के आरोप के आधार पर 5 सितंबर 2021 को सोनारी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसमें पति सोनू कुशवाहा समेत ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों को नामजद किया गया था।


मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंजू कुमारी की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास सामने आए।

सबसे अहम मोड़ तब आया जब मृतका के ससुर ने प्रति-परीक्षण (cross-examination) में स्वीकार किया कि घटना के समय आरोपी सोनू कुशवाहा दिल्ली में मौजूद था। उन्होंने यह भी माना कि उन्होंने खुद नहीं देखा कि सुषमा को जहर किसने दिया।

इसके अलावा, यह भी सामने आया कि प्राथमिकी (FIR) किसी और—मुन्ना तिवारी—द्वारा लिखी गई थी और सूचक ने केवल उस पर हस्ताक्षर किया था।


आरोपी और उसके परिवार की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, शिव शंकर प्रसाद और बबिता जैन ने अदालत में जोरदार पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि पूरे मामले में केवल आरोप हैं, लेकिन कोई प्रत्यक्ष या पुख्ता साक्ष्य नहीं है जो आरोपी को दोषी ठहरा सके।



सभी पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, जो आरोपी के खिलाफ पर्याप्त नहीं हैं। इसी आधार पर सोनू कुशवाहा को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।


यह फैसला एक बार फिर यह दर्शाता है कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं। केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

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