Dumaria : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत केंदुआ पंचायत के बादलगोड़ा गांव में किसानों ने प्रशासनिक उदासीनता के बीच एकजुटता और श्रमदान की मिसाल पेश की है। धान की खेती के लिए समय पर सिंचाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने वर्षों से जर्जर पड़े नाले की सफाई कर स्वयं नया कच्चा नाला तैयार किया, जिससे नदी का पानी अब खेतों तक पहुंचने लगा है।
धान की रोपाई के मौसम में खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए गांव के किसान लंबे समय से पुराने नाले पर निर्भर थे। समय के साथ नाला जर्जर हो गया, जिससे सिंचाई प्रभावित होने लगी और फसल के सूखने का खतरा पैदा हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से पक्के नाले के निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आश्वासनों के अलावा उन्हें कोई ठोस पहल देखने को नहीं मिली।
खेती पर संकट गहराता देख गांव के किसानों, युवाओं और महिलाओं ने किसी सरकारी सहायता का इंतजार करने के बजाय स्वयं पहल करने का निर्णय लिया। ग्रामीणों ने समिति बनाकर श्रमदान शुरू किया और फावड़ा-कुदाल के सहारे पुराने नाले की सफाई के साथ खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नया कच्चा नाला तैयार कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सामूहिक प्रयास से धान की रोपाई और सिंचाई का कार्य आसान हो गया है। उनका आरोप है कि हर वर्ष सिंचाई की समस्या बनी रहती है और जनप्रतिनिधियों की ओर से केवल आश्वासन मिलते हैं, जबकि धरातल पर कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
ग्रामीणों की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। उन्होंने एक बार फिर शासन और प्रशासन से मांग की है कि किसानों की सुविधा और कृषि उत्पादन को ध्यान में रखते हुए इस अस्थायी कच्चे नाले को शीघ्र ही पक्के सिंचाई नाले में तब्दील किया जाए, ताकि भविष्य में किसानों को ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।








