ब्रेन ट्यूमर अब नहीं रहा लाइलाज बीमारी का पर्याय, समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से बढ़ी उम्मीदें

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Jamshedpur : “ब्रेन ट्यूमर” का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय और अनिश्चितता का भाव पैदा हो जाता है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में हुई तेज़ प्रगति ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, आधुनिक तकनीकों और उन्नत उपचार पद्धतियों के कारण आज ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हैं।

टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) के हेड कंसल्टेंट एवं एचओडी (इनडोर सर्विसेज) डॉ. जीवेश मल्लिक के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क या उसकी झिल्लियों में असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि के कारण विकसित होता है। यह बेनाइन (गैर-कैंसरकारी) या मैलिग्नेंट (कैंसरकारी) दोनों प्रकार का हो सकता है। हालांकि इसकी घटनाएं स्तन, फेफड़े या बड़ी आंत के कैंसर की तुलना में कम होती हैं, फिर भी यह गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि विश्व स्तर पर प्रति एक लाख आबादी में हर वर्ष लगभग 10 से 15 लोगों में ब्रेन ट्यूमर का निदान होता है। भारत में भी हर साल हजारों नए मामले सामने आते हैं। एमआरआई जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं की बढ़ती उपलब्धता के कारण अब बीमारी की पहचान पहले की तुलना में अधिक जल्दी संभव हो रही है।

डॉ. मल्लिक के मुताबिक, लगातार रहने वाला या समय के साथ बढ़ता सिरदर्द, विशेषकर सुबह के समय उल्टी के साथ होने वाला दर्द, ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है। इसके अलावा दौरे पड़ना, हाथ-पैरों में कमजोरी, बोलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना, दोहरा दिखाई देना, याददाश्त कमजोर होना और व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे लक्षण भी चेतावनी संकेत हैं।

बच्चों में सिर का असामान्य रूप से बढ़ना, विकास में देरी और बार-बार उल्टी होना भी गंभीर संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहली बार दौरा पड़ने, अचानक देखने या बोलने की क्षमता प्रभावित होने अथवा लगातार बढ़ते सिरदर्द की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

ब्रेन ट्यूमर के उपचार में सर्जरी अब भी प्रमुख भूमिका निभाती है। आधुनिक न्यूरोसर्जरी तकनीकों, ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप और इमेज-गाइडेड सर्जरी की मदद से ट्यूमर को अधिक सुरक्षित और सटीक तरीके से हटाया जा रहा है। टाटा मेन हॉस्पिटल में वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप की सहायता से नियमित रूप से ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी की जा रही है, जिससे मरीजों को बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी के साथ-साथ गामा नाइफ रेडियोसर्जरी जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी उपचार को नई दिशा दे रही हैं। बिना चीरे के अत्यधिक केंद्रित रेडिएशन के जरिए चुनिंदा ट्यूमर का इलाज संभव हो रहा है। वहीं ट्यूमर की मॉलिक्यूलर जांच डॉक्टरों को मरीज की स्थिति के अनुरूप व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करने में मदद कर रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जीन थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और ट्यूमर वैक्सीन जैसे नए उपचार विकल्पों पर दुनिया भर में तेजी से शोध चल रहा है। इन तकनीकों से भविष्य में ब्रेन ट्यूमर के इलाज को और अधिक प्रभावी बनाने की उम्मीद है।

डॉ. जीवेश मल्लिक का कहना है कि न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच, विशेषज्ञों की सलाह और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की मदद से आज ब्रेन ट्यूमर के मरीजों के स्वस्थ जीवन की संभावना पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

“ब्रेन ट्यूमर अब सिर्फ डर का नाम नहीं, बल्कि समय पर पहचान और सही उपचार के साथ उम्मीद और बेहतर जीवन की कहानी भी है।”

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