आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली: जर्जर सड़कें, अंधेरा और असुरक्षा से जूझ रहा जियाडा हब

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Adityapur : झारखंड के सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) आदित्यपुर की वर्तमान स्थिति गंभीर चिंताओं को जन्म दे रही है। करोड़ों का राजस्व देने वाला यह औद्योगिक क्षेत्र आज बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से जूझ रहा है, जिससे न केवल उद्योग बल्कि मजदूरों और निवेश के भविष्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

राजस्व देता क्षेत्र, विकास में पिछड़ता ढांचा

यह क्षेत्र हर वर्ष सरकार को भारी राजस्व देता है, लेकिन यहां की सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़कें जगह-जगह टूट गई हैं और गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जल निकासी की व्यवस्था लगभग ध्वस्त है, जिससे बरसात के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं।

उद्यमियों का कहना है कि कमजोर बुनियादी ढांचा नए निवेशकों को आकर्षित करने में बड़ी बाधा बन रहा है। कच्चे माल की ढुलाई में देरी और उत्पादन में गिरावट से उद्योगों को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सुरक्षा का संकट, महिलाओं में भय का माहौल

औद्योगिक क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट और सीसीटीवी कैमरों की भारी कमी है। रात के समय पूरा इलाका अंधेरे में डूबा रहता है, जिससे खासकर महिला कामगारों के लिए स्थिति बेहद असुरक्षित हो गई है।

अंधेरे रास्तों पर छेड़खानी और आपराधिक घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। वहीं, सीसीटीवी के अभाव में चोरी की वारदातों में भी इजाफा हुआ है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

जन स्वास्थ्य पर भी मंडरा रहा खतरा

टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल मजदूरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रही है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं। गड्ढों में जमा पानी मच्छरों के प्रजनन का केंद्र बन रहा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय उद्योगपतियों और मजदूर संगठनों ने प्रशासन से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं—

पैचवर्क के बजाय टिकाऊ आरसीसी सड़कों का निर्माण

पूरे क्षेत्र में एलईडी/सोलर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था

सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क और पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी

सड़क और नाली सफाई के लिए स्थायी मॉनिटरिंग व्यवस्था


प्रशासनिक विफलता पर उठे सवाल

क्षेत्र की बदहाली को लेकर आदित्यपुर नगर निगम और जियाडा प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि जब वे टैक्स दे रहे हैं और मजदूर कड़ी मेहनत कर रहे हैं, तो बदले में बुनियादी सुविधाओं की ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो “मेक इन झारखंड” जैसे प्रयासों को झटका लग सकता है और आदित्यपुर का औद्योगिक महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है।

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