कोल्हान विश्वविद्यालय सीनेट बैठक में विधायक मंगल कालिंदी ने उठाए  अहम मुद्दे

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Chaibasa : कोल्हान विश्वविद्यालय की सीनेट बैठक में जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। बैठक में कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता समेत विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायक शामिल हुए, जहां विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई।

विधायक मंगल कालिंदी ने बैठक में कुल छह प्रमुख प्रस्ताव रखते हुए खास तौर पर बोड़ाम क्षेत्र में नव-निर्मित डिग्री कॉलेज को लेकर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि कॉलेज में जल्द से जल्द पठन-पाठन शुरू कराया जाए, ताकि स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर न जाना पड़े।

इसके साथ ही उन्होंने कॉलेज का नाम झारखंड के जननायक स्वर्गीय शिबू सोरेन के नाम पर रखने का प्रस्ताव भी रखा। उनका कहना था कि इससे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और क्षेत्रीय गौरव को बढ़ावा मिलेगा।

मंगल कालिंदी ने छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जमशेदपुर स्थित विश्वविद्यालय शाखा कार्यालय से ही डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था की मांग की, ताकि छात्रों को चाईबासा तक नहीं जाना पड़े।

खेल प्रतिभाओं के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कोल्हान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्रावधान तो है, लेकिन इसका लाभ खिलाड़ियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई।

शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए विधायक ने कहा कि कई कॉलेजों में पाठ्यक्रम पूरा किए बिना ही परीक्षाएं आयोजित कराई जा रही हैं, जिससे छात्रों के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय से सिलेबस समय पर पूरा कराने और पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की।

इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय और इसके अधीनस्थ महाविद्यालयों में तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित शिक्षकों और कर्मचारियों के स्थानांतरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थापना से प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित होती है और कार्यप्रणाली में मनमानी की आशंका बढ़ती है।

बैठक में उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपने सुझाव रखे। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन प्रस्तावों पर क्या कदम उठाता है और छात्रों व शिक्षकों को इसका कितना लाभ मिल पाता है।

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