Ranchi : जिले के बुंडू प्रखंड के एक छोटे से गांव गोसाइडीह के निवासी Dev Krishna Suman ने अपनी मेहनत, संघर्ष और कौशल के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले देव कृष्ण सुमन ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए लगातार आगे बढ़ने का प्रयास किया। उनके पिता बुधेश्वर गोराई शिक्षक थे और माता शोभा देवी सिलाई कार्य कर परिवार का सहयोग करती थीं।
देव ने प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बुंडू से प्राप्त की और वर्ष 2018 में झारखंड बोर्ड की परीक्षा में टॉप-10 मेधावी छात्रों में स्थान हासिल किया। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखने के लिए स्वयं बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता का विकास हुआ।
वर्ष 2020 में उन्होंने Tata Steel Foundation एवं झारखंड सरकार के सहयोग से संचालित आईटीआई तमाड़ में टर्नर ट्रेड में नामांकन लिया। कोविड-19 जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखी और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
प्रशिक्षण के दौरान ही उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से नौकरी मिली। इसके बाद जमशेदपुर में कार्य करते हुए उन्होंने खुद को एक कुशल सीएनसी प्रोग्रामर के रूप में स्थापित किया और विभिन्न आधुनिक मशीनों एवं तकनीकों में महारत हासिल की।
उनकी मेहनत का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया, जब उन्हें हांगकांग की प्रतिष्ठित कंपनी में चयनित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय अवसर के तहत उन्हें लगभग 2.08 लाख रुपये मासिक वेतन के साथ आवास एवं यात्रा सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं।
देव की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह Tata Steel Foundation और आईटीआई तमाड़ के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। संस्थान के अनुसार, देव उन चुनिंदा प्रशिक्षुओं में शामिल हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार प्राप्त किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देव की कहानी यह साबित करती है कि कौशल आधारित शिक्षा, सही मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत से कोई भी युवा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
देव की यह यात्रा एक प्रेरणादायक संदेश देती है कि सीमित संसाधन सफलता की राह में बाधा नहीं बनते, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो।










