Jamshedpur : जमशेदपुर में यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के खिलाफ अब आंदोलन तेज होने जा रहा है। रेल यात्री संघर्ष समिति द्वारा 26 अप्रैल को Tatanagar Junction railway station पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में यात्रियों को जोड़ने की तैयारी की गई है।
इस संबंध में केबुल टाउन में आयोजित बैठक में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक Saryu Rai भी शामिल हुए। उन्होंने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि 15-15 लोगों की टोलियां बनाई जाएं, जो स्टेशन के हर प्लेटफॉर्म पर जाकर यात्रियों से फीडबैक लेंगी।
यात्रियों की राय लेने के लिए पर्चे वितरित किए जाएंगे, जिनमें क्यूआर कोड भी होगा, ताकि यात्री डिजिटल माध्यम से भी अपनी बात रख सकें। इसके अलावा स्टेशन परिसर के बाहर एक व्हाइट बोर्ड लगाया जाएगा, जहां यात्री अपने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति दर्ज कर सकेंगे।
बैठक में घाटशिला के यात्रियों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। बताया गया कि कई ट्रेनें घाटशिला में नहीं रुकतीं और टाटानगर में ही ठहरती हैं। ऐसे में यदि ट्रेनें देर से पहुंचती हैं, तो घाटशिला जाने वाले यात्रियों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता देने का निर्णय किस स्तर पर लिया जा रहा है—क्या यह निर्णय डीआरएम, रेलवे बोर्ड या महाप्रबंधक स्तर पर हुआ है? चक्रधरपुर डिवीजन से इस पर स्पष्ट जवाब मांगा गया है।
इधर, Janata Dal (United) महानगर इकाई की बैठक में भी इस अभियान को सफल बनाने पर जोर दिया गया। अध्यक्ष अजय कुमार ने कार्यक्रम को व्यापक बनाने की अपील की, जबकि जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए टोली बनाकर अभियान चलाने का सुझाव दिया।
रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह ने सभी नागरिकों और सामाजिक संगठनों से 26 अप्रैल को सुबह 9:30 बजे स्टेशन पहुंचकर अभियान में शामिल होने की अपील की।
बैठक में कुलविंदर सिंह पन्नू, अंजलि सिंह, संजय ठाकुर, शंकर कर्मकार, शमशाद खान, चुन्नू भूमिज, प्रवीण सिंह, दुर्गा राव, विजय सिंह, संजीव सिंह, अशोक सिंह, मृत्युंजय शर्मा, दिनेश सिंह, देव कुमार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह अभियान शहर में रेल सेवाओं की स्थिति को लेकर बढ़ती नाराजगी का संकेत है, जो आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।











