Jamshedpur: दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे डायबिटीज के मामलों के बीच टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) के वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक पटनायक ने मधुमेह से जुड़ी एक गंभीर जटिलता डायबिटिक रेटिनोपैथी (DR) के प्रति जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया है।
डॉ. पटनायक के अनुसार, “डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। यह धीरे-धीरे आंखों के रेटिना को भी नुकसान पहुंचाती है, जो दृष्टि हानि और अंधत्व तक का कारण बन सकती है।”
विश्व स्तर पर अनुमान है कि वर्ष 2045 तक लगभग 16 करोड़ वयस्क इस बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं।
मौन लेकिन खतरनाक रोग
डायबिटिक रेटिनोपैथी का सबसे बड़ा खतरा इसकी मौन प्रकृति है। शुरुआती चरणों में कोई लक्षण नजर नहीं आते — न दर्द, न लालिमा, न धुंधलापन। जब मरीज को दृष्टि कमजोर लगनी शुरू होती है, तब तक रोग अक्सर उन्नत अवस्था में पहुंच चुका होता है।
डॉ. पटनायक कहते हैं, “हर डायबिटिक व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार संपूर्ण नेत्र जांच करानी चाहिए, भले ही नजर सामान्य लगे।”
लक्षण जिन पर दें ध्यान
दृष्टि धुंधली होना
आंखों के सामने काले धब्बे या तैरते हुए छायाएं दिखना
रात में देखने में कठिनाई
अचानक दृष्टि घटना या न दिखना
इनमें से कोई भी संकेत दिखने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और इलाज से 90% मामलों में दृष्टि हानि को रोका जा सकता है।
टाटा मेन हॉस्पिटल में अत्याधुनिक सुविधा
TMH का नेत्र विभाग अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है, जिनमें Zeiss OCT, Clarus FFA और रेटिनल लेज़र मशीनें शामिल हैं। इनकी मदद से रेटिना की सटीक जांच और उपचार संभव है।
उपचार के विकल्पों में शामिल हैं —
लेज़र फोटोकोएग्यूलेशन
इंट्राविट्रियल इंजेक्शन (एंटी-VEGF या स्टेरॉयड)
विट्रेक्टॉमी सर्जरी (जटिल मामलों में)
रोकथाम ही सबसे अच्छा इलाज
डॉ. पटनायक का संदेश स्पष्ट है —
“डायबिटिक रेटिनोपैथी से दृष्टि बचाना संभव है, अगर आप नियमित जांच करवाएं, ब्लड शुगर नियंत्रित रखें, और जीवनशैली में सुधार लाएं।”
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और दवाओं का पालन इस दिशा में बेहद जरूरी कदम हैं।
संदेश
“आंखों की रोशनी हमारी सबसे कीमती संपत्ति है।
डायबिटिक रेटिनोपैथी बिना दर्द और बिना संकेत के आगे बढ़ती है।
इसलिए देर न करें — आज ही अपनी नेत्र जांच करवाए
नवंबर माह ‘विश्व मधुमेह जागरूकता माह’ के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर नेत्र विशेषज्ञों की अपील है —
“मधुमेह पर नियंत्रण रखें और अपनी आंखों की रोशनी सुरक्षित रखें।”









