जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले स्थित केरूआडूंगरी पंचायत माहवारी स्वच्छता और महिला जागरूकता की दिशा में एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है। पंचायत के तुरामडीह गांव को “मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री विलेज” घोषित किया गया है, जहां अब सभी महिलाएं और किशोरियां पर्यावरण अनुकूल रियूजेबल सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर रही हैं।
शनिवार को पंचायत के मुखिया कान्हु मुर्मू ने औपचारिक रूप से तुरामडीह गांव को पंचायत का पहला “मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री विलेज” घोषित किया। इस पहल के पीछे पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक संस्था निश्चय फाउंडेशन और प्रोजेक्ट बाला के संयुक्त प्रयास को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

करीब तीन वर्ष पहले पंचायत में महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा सैनिटरी पैड के उपयोग को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया गया था। अब इसका सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। गांव की महिलाएं न केवल माहवारी से जुड़े सामाजिक टैबू को तोड़ रही हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठा रही हैं।

रियूजेबल सैनिटरी पैड के उपयोग से महिलाओं को हर महीने होने वाले खर्च से राहत मिल रही है। साथ ही, इससे सैनिटरी पैड से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट में कमी आने से पर्यावरण को भी लाभ पहुंच रहा है। पंचायत ने जल्द ही सभी गांवों को “मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री विलेज” घोषित करने का लक्ष्य रखा है। ऐसा होने पर केरूआडूंगरी संभवतः झारखंड का पहला “मेंस्ट्रुअल वेस्ट फ्री पंचायत” बन जाएगा।

इस मौके पर झारखंड के “पैडमैन” के नाम से प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं निश्चय फाउंडेशन के संस्थापक तरुण कुमार ने कहा कि वर्षों पहले गांवों की महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का जो सपना देखा गया था, वह अब धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव लाने में पंचायत और जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद अहम होती है।
कार्यक्रम में सहिया साथी शुरुवाली हेंब्रम, सेविका सविता नायक, सहिया रानदाए हो, वार्ड सदस्य सुमन पाडेया, टीएसएफ फेलो सिदलाल टुडू सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और किशोरियां उपस्थित थीं।











