SUCCESS STORY : पूर्वी सिंहभूम में आदिवासी विकास की नई इबारत: धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम-जनमन योजना का दिखने लगा असर

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जमशेदपुर, 9 मई: पूर्वी सिंहभूम जिला आदिवासी समुदायों के समग्र विकास की दिशा में नए मानक स्थापित कर रहा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम जनमन योजना के अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, आजीविका और बुनियादी संरचना पर केंद्रित प्रयासों से 399 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में जमीनी बदलाव दिखाई देने लगे हैं।


अभियान के पहले चरण में जहां आवासहीनों के लिए स्वीकृत आवासों का निर्माण शुरू किया गया है, वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण, छात्रावासों का सौंदर्यीकरण और ट्राइबल मल्टीपर्पस मार्केटिंग सेंटर (TMMC) की स्थापना का कार्य भी तेजी से प्रगति पर है।

12 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण

जिले में 12 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण निर्धारित किया गया है, जिनमें धालभूमगढ़ एवं डुमरिया प्रखंड के गांव प्रमुख हैं। सभी केंद्रों के लिए भूमि चिह्नित हो चुकी है और निर्माण कार्य मई माह से शुरू किया जा रहा है। नामोसोल की सेविका चंचला किस्कू ने इसे स्थानीय महिलाओं व बच्चों के लिए बड़ा बदलाव बताया।



जनजातीय छात्रावासों और विद्यालयों का सौंदर्यीकरण

अभियान के तहत 7 अनुसूचित जनजातीय छात्रावासों और विद्यालय परिसरों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिसमें बहरागोड़ा, चाकुलिया, घाटशिला और गुड़ाबांदा के प्रतिष्ठान शामिल हैं।

आदिवासी आजीविका को नया आयाम: TMMC

आदिवासी उत्पादों की ब्रांडिंग, विपणन और बिक्री को सुगम बनाने के उद्देश्य से 3 प्रखंडों के 15 से अधिक गांवों में ट्राइबल मल्टीपर्पस मार्केटिंग सेंटर (TMMC) का निर्माण प्रस्तावित है।



PM-JANMAN योजना से सबर परिवारों को राहत

पीएम जनमन योजना के अंतर्गत जिले के सबर बहुल गांवों में अब तक 1679 परिवारों को आवास योजना से जोड़ा गया है, जिनमें 1218 को स्वीकृति मिली और 142 आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है। लाभुक राजू सबर ने बताया कि अब वह पक्का मकान होने से सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं।

17 मल्टी पर्पस सेंटर प्रस्तावित

पीएम जनमन योजना के तहत 5 प्रखंडों में 17 मल्टी पर्पस सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे समुदाय को साझा स्थान, प्रशिक्षण और सेवा केंद्र जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

प्रशासन की प्रतिबद्धता

जिला उपायुक्त अनन्य मित्तल और आईटीडीए परियोजना निदेशक दीपांकर चौधरी ने बताया कि यह योजनाएं आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समावेशी विकास के मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभागों को पारदर्शिता और सहभागी कार्यप्रणाली के साथ योजनाओं को क्रियान्वित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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