SC ST Railway Employee Association दक्षिण पूर्व रेलवे के एससी/एसटी कर्मचारी संघ ने तांती/ततवा और लोहार जाति के कर्मचारियों द्वारा असंवैधानिक जाति लाभ दावों के खिलाफ कार्रवाई का स्वागत किया, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके दावों को अमान्य कर दिया था।

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Jamshedpur :दक्षिण पूर्व रेलवे के अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति रेलवे कर्मचारी संघ की शिकायत पर बिहार राज्य से आने वाले तांती/तत्वा और लोहार जातियों के कर्मचारियों के फर्जी जाति प्रमाणपत्रों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में इन कर्मचारियों को मिलने वाले आरक्षण लाभ को अवैध घोषित करते हुए हटाने के आदेश जारी किए गए हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा – केवल संसद कर सकती है अनुसूचित जाति/जनजाति सूची में बदलाव

बिहार सरकार ने वर्ष 2015 में संकल्प संख्या 9532 के तहत तांती/तत्वा जाति को अत्यंत पिछड़ा वर्ग से निकालकर अनुसूचित जाति में शामिल कर दिया था, जिसके बाद इन जातियों के लोगों ने एससी प्रमाणपत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों और योजनाओं में आरक्षण का लाभ लेना शुरू कर दिया। इसी तरह 2016 में लोहार जाति को ओबीसी से एसटी में शामिल कर लाभ दिया गया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर विचार मंच बनाम बिहार राज्य’ मामले में स्पष्ट कर दिया कि अनुसूचित जाति या जनजाति की सूची में कोई भी बदलाव केवल संसद द्वारा किया जा सकता है, राज्य सरकार द्वारा नहीं।


रेलवे कर्मचारी संघ की शिकायत पर हुई बड़ी कार्रवाई

इस फर्जीवाड़े के खिलाफ 07 जनवरी 2025 को दक्षिण पूर्व रेलवे के अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ ने लिखित शिकायत की थी। इसके आधार पर 17 अप्रैल 2025 को प्रधान मुख्य कार्मिक अधिकारी ने सभी मंडलों को पत्र जारी कर कहा कि जो कर्मचारी इन जातियों के फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर लाभ ले रहे हैं, उन्हें हटाया जाए और वैध SC/ST कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।



संगठन की कार्यवाही से कर्मचारियों में खुशी

इस आदेश के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के वैध SC/ST कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। कर्मचारी संघ की इस सक्रियता की सराहना की जा रही है। संगठन का कहना है कि वह भविष्य में भी जातिगत आरक्षण प्रणाली की गरिमा बनाए रखने के लिए तत्पर रहेगा।

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