Indian Geologists : भारत के औद्योगिक जागरण के जनक: पी. एन. बोस की जयंती पर विशेष

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Jamshedpur : भारत के खनिज और भूविज्ञान क्षेत्र को नई दिशा देने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक प्रमथनाथ बोस (पी. एन. बोस) की जयंती पर आज उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। पश्चिम बंगाल के गायपुर गांव में जन्मे बोस का प्रारंभिक जीवन प्रकृति के बीच बीता, जिसने उन्हें भूविज्ञान की ओर आकर्षित किया। विदेश में शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (Geological Survey of India) में अहम जिम्मेदारियाँ निभाईं। सिवालिक पहाड़ियों में जीवाश्मों का अध्ययन, असम में तेल की खोज और मध्य भारत व शिलांग पठार में खनिज सर्वेक्षण उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।



पी. एन. बोस एक सच्चे राष्ट्रवादी थे। स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने विज्ञान को भारत के विकास का माध्यम बनाया। उन्होंने बंगाल टेक्निकल इंस्टिट्यूट (वर्तमान जादवपुर विश्वविद्यालय) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई और उसके पहले मानद प्रधानाचार्य भी बने।



उन्होंने उस समय के औपनिवेशिक मानसिकता को चुनौती दी जब भारत के वैज्ञानिकों को हीन समझा जाता था। जे. एन. टाटा द्वारा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना में अवरोध पैदा करने वाले लॉर्ड कर्जन का उन्होंने मुखर विरोध किया।



उनका सबसे ऐतिहासिक योगदान भारत के इस्पात उद्योग की नींव रखना रहा। ओडिशा के मयूरभंज में लोहे के समृद्ध भंडार की जानकारी उन्होंने जे. एन. टाटा को दी, जिसके आधार पर जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना हुई—भारत का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र।



भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी माना था कि पी. एन. बोस ने औद्योगिक विकास की उस शक्ति को पहचाना जो गरीबी दूर करने और राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक हो सकती है। पी. एन. बोस का जीवन आज भी प्रेरणा का स्रोत है—ज्ञान, नेतृत्व और दूरदृष्टि का अद्भुत संगम, जिसने भारत को औद्योगिक रूप से सशक्त बनाने की नींव रखी।

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