पेसा कानून के उल्लंघन के खिलाफ माझी परगना महाल आंदोलन को समर्थन, राम सिंह मुंडा ने जताई आपत्ति

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Jamshedpur: जमशेदपुर आदिवासी सुरक्षा परिषद के जिला अध्यक्ष श्री राम सिंह मुंडा ने झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भेजकर जमशेदपुर प्रखंड क्षेत्र की लगभग 30 पंचायतों को नगर निकाय में शामिल करने की योजना का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम पेसा कानून 1996 (PESA Act, 1996) का सीधा उल्लंघन है और इससे आदिवासी पंचायत क्षेत्रों की स्वायत्तता एवं पारंपरिक अधिकारों पर गंभीर आघात पहुंचेगा।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि बागबेड़ा, कीताडीह, परसुडीह, गोविंदपुर, गधड़ा, घोड़ा बंधा सहित कई पंचायतों को जुगसलाई नगर परिषद या जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) में शामिल करने की योजना पर नगर विकास विभाग के तहत सर्वेक्षण कार्य चल रहा है। यह कार्य डीडीसी जमशेदपुर के नेतृत्व में किया जा रहा है।

राम सिंह मुंडा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को नगर निकाय में शामिल करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि इससे आदिवासी समुदायों की जीवनशैली, परंपराएं और उनके संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पंचायती राज व्यवस्था कमजोर होगी और ग्राम सभा की पारंपरिक शक्तियां समाप्त हो जाएंगी।

उन्होंने इस प्रस्तावित योजना के निम्नलिखित दुष्परिणाम गिनाए:

  1. पंचायतों की स्वायत्तता और निर्णय लेने की शक्ति कम होगी।

  2. स्थानीय मुद्दों की उपेक्षा होगी।

  3. पारंपरिक संसाधन प्रबंधन अधिकारों का क्षरण होगा।

  4. आदिवासी रीति-रिवाज और आजीविका प्रभावित होगी।

  5. विकास की दिशा बदलकर शहरी प्राथमिकताओं की ओर केंद्रित होगी।

  6. ग्राम सभा की पारंपरिक भूमिका खत्म हो जाएगी।

  7. ग्रामीणों पर होल्डिंग टैक्स का नया आर्थिक बोझ पड़ेगा।

  8. पेसा कानून का उल्लंघन करते हुए संवैधानिक व्यवस्था को दरकिनार किया जाएगा।

     

उन्होंने माझी परगना महाल द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए सरकार से इस योजना को तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है। इस प्रतिनिधिमंडल में राम सिंह मुंडा के साथ प्रकाश सांडील, रामा कांत कारुआ, बबलू करुआ, उमेश पुरान और जुझार समद भी शामिल रहे।

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