Dumaria: पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत आस्ताकोवाली पंचायत के आस्ताकोवाली गांव स्थित पोड़ाडीहा टोला में विकास की तस्वीर आज भी ग्रामीणों की मुश्किलों को बयां कर रही है। नाले पर पक्के पुल का निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीण वर्षों से बांस की अस्थायी पुलिया के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। यह पुलिया आसपास के चार से पांच गांवों के लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, प्रतिदिन स्कूली बच्चे, किसान, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग इसी बांस की पुलिया से होकर नाला पार करते हैं। गर्मी के दिनों में किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है। नाले का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बांस की पुलिया पर फिसलन और बहाव का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में लोगों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान बच्चों को स्कूल भेजना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता। वहीं किसानों और मजदूरों को रोजमर्रा के काम के लिए इसी जोखिम भरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ता है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पक्के पुल के निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई जा चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि हर बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी धरातल पर स्थायी पुल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी उनके क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। एक स्थायी पुल के अभाव में कई गांवों के लोगों को रोजाना परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पक्के पुल का निर्माण शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की स्थिति के लिए प्रशासन जिम्मेदार होगा।

















