Jamshedpur : झारखंड सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के पदों पर राजनीतिक दलों के सक्रिय प्रवक्ताओं की नियुक्ति का विरोध करते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट एवं आरटीआई कार्यकर्ता संघ के केंद्रीय महासचिव कृतिवास मंडल ने इसे लोकतंत्र, पारदर्शिता और सूचना के अधिकार की भावना पर सीधा प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि यह नियुक्ति सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 तथा सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की मूल भावना के विपरीत है।
कृतिवास मंडल ने कहा कि सूचना आयोग एक स्वतंत्र एवं अर्ध-न्यायिक संस्था है, जिसका उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार दिलाना है। उन्होंने दावा किया कि सूचना आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों की नियुक्ति से आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष से जुड़े राजनीतिक प्रवक्ताओं की नियुक्ति कर संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। उनका कहना है कि जब राजनीतिक दलों से जुड़े लोग सूचना आयुक्त बनेंगे, तो भ्रष्टाचार, घोटालों और जनहित से जुड़े मामलों में निष्पक्ष निर्णय पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
कृतिवास मंडल ने कहा कि झारखंड में सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, न्यायविद, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सूचना अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत कई अनुभवी लोग उपलब्ध हैं। ऐसे में योग्य एवं गैर-राजनीतिक व्यक्तियों की अनदेखी कर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की नियुक्ति करना आयोग की साख को प्रभावित करने वाला कदम है।
आरटीआई कार्यकर्ता संघ ने मांग की है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बनाया जाए तथा सूचना का अधिकार अधिनियम एवं न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप योग्य, निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को ही इन पदों पर नियुक्त किया जाए।
संघ ने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने जनभावनाओं और आपत्तियों पर विचार नहीं किया, तो राज्यभर में लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।








