रिम्स अपनी नियमावली बनाए, रोस्टर सिस्टम ऑनलाइन करे: एनसीएसटी सदस्य डॉ. आशा लकड़ा

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Ranchi  : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मंगलवार को राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की प्रशासनिक व्यवस्था, डॉक्टरों एवं प्रोफेसरों की नियुक्ति, आरक्षण रोस्टर, शिकायत निवारण प्रणाली तथा मरीज सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने रिम्स प्रबंधन को संस्थान की स्वायत्त (ऑटोनॉमस) व्यवस्था के अनुरूप अपनी स्वतंत्र नियमावली तैयार करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया।

डॉ. लकड़ा ने कहा कि रिम्स को स्वायत्त संस्था इसलिए बनाया गया है ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो और समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके। लेकिन जानकारी के अभाव में संस्थान अब भी कई मामलों में राज्य सरकार पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि ऑटोनॉमस संस्था होने के नाते रिम्स को अपनी नियमावली स्वयं बनानी चाहिए, जबकि राज्य सरकार से मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ पूर्ववत मिलते रहेंगे।

उन्होंने डॉक्टरों, प्रोफेसरों, जूनियर डॉक्टरों और एमबीबीएस चिकित्सकों की सीधी एवं बैकलॉग नियुक्तियों की समीक्षा करते हुए सभी श्रेणियों के लिए अलग-अलग रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने पूछा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित 26 प्रतिशत आरक्षण के अनुरूप नियुक्तियां हुई हैं या नहीं।

डॉ. लकड़ा ने कहा कि यदि कोई अनुसूचित जनजाति वर्ग का अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी में चयनित होता है तो उसे सामान्य श्रेणी में ही समायोजित किया जाना चाहिए और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीट को उसी वर्ग के अन्य अभ्यर्थी से भरा जाना चाहिए। उन्होंने पूरी रोस्टर प्रणाली को ऑनलाइन करने का निर्देश भी दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग में लायजन अधिकारी (Liaison Officer) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि आरक्षण रोस्टर और संबंधित प्रक्रियाओं का सही अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

आयोग की सदस्य ने रिम्स में प्रभावी ग्रीवांस रिड्रेसल सेल गठित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, ईडब्ल्यूएस, महिला समेत विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों वाली 10-12 सदस्यीय समिति बनाई जाए, ताकि कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों की शिकायतों का समाधान संस्थान स्तर पर ही हो सके।

मरीजों की सुविधा पर जोर देते हुए डॉ. लकड़ा ने कहा कि रिम्स में झारखंड के अलावा छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा छोटानागपुर एवं कोल्हान क्षेत्र से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसलिए ओपीडी में सभी आवश्यक सूचनाएं हिंदी में प्रदर्शित की जाएं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता की जानकारी नियमित रूप से समाचार पत्रों के माध्यम से भी प्रकाशित कराई जाए।

उन्होंने रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि सुरक्षा गार्डों को प्रशिक्षण दिया जाना सकारात्मक पहल है। हालांकि उन्होंने नई नियुक्त नर्सों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार संबंधी नियमित प्रशिक्षण (कैपेसिटी बिल्डिंग) पर विशेष बल दिया।

डॉ. लकड़ा ने निर्देश दिया कि आंतरिक शिकायतों की समीक्षा के लिए प्रत्येक तीन माह में बैठक आयोजित की जाए तथा संस्थान के निदेशक के साथ प्रत्येक छह माह में समीक्षा बैठक कर शिकायतों के निष्पादन और प्रशासनिक सुधार की प्रगति का मूल्यांकन किया जाए।

बैठक में आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, विधिक सलाहकार शुभाशीष सोरेन एवं राहुल यादव, अन्वेषक रिया, निजी सचिव कुशेश्वर साहू, निजी सहायक विवेक कुमार सहित रिम्स के निदेशक, अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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