Jamshedpur : जादूगोड़ा स्थित प्रसिद्ध मां रंकनी मंदिर परिसर में ग्रामसभा की सहमति के बिना करीब 19 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के कार्यान्वयन के आरोपों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर बुधवार को पोटका प्रखंड के कल्याण पदाधिकारी ने रोहणीबेड़ा और बड़ा झरनाहिल गांव पहुंचकर ग्रामीणों से मुलाकात की और मामले की जमीनी स्थिति की जानकारी ली।
गौरतलब है कि मां रंकनी मंदिर परिसर में प्रस्तावित एवं संचालित विभिन्न निर्माण एवं विकास कार्यों को लेकर ग्रामसभा की ओर से पूर्व में उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम को आवेदन देकर जांच की मांग की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्रामसभा को बिना जानकारी, सहभागिता और सहमति के योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी शिकायत के आधार पर प्रखंड स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू की गई है।
जांच के दौरान ग्रामीणों ने धुमकुड़िया भवन, टुयला पहाड़, मां रंकनी मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों, प्रस्तावित परियोजनाओं, धार्मिक ट्रस्ट के गठन तथा ग्रामसभा की सहमति से जुड़े विभिन्न मुद्दों को अधिकारियों के समक्ष रखा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने और ग्रामसभा के संवैधानिक एवं पारंपरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना था कि यह क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां ग्रामसभा की सहमति के बिना विकास योजनाओं का क्रियान्वयन पेसा (PESA) अधिनियम की भावना के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र का विकास हो, पर्यटन को बढ़ावा मिले और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें, लेकिन विकास योजनाओं का संचालन ग्रामसभा की अनुमति और सहभागिता के साथ ही किया जाना चाहिए।
प्रखंड कल्याण पदाधिकारी ने ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में रोहणीबेड़ा ग्राम के माझी बाबा राजा सोरेन सहित बड़ी संख्या में ग्रामसभा के प्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।







