LINDE INDIA प्रबंधन को झुकना पड़ा, दो श्रमिकों को मिला ₹3.40 लाख का बकाया भुगतान

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Jamshedpur:श्रमिक अधिकारों की लड़ाई में जमशेदपुर से एक अहम और मिसाल बनने वाली खबर सामने आई है। बहुराष्ट्रीय कंपनी LINDE INDIA LIMITED (पूर्व नाम: BOC India Limited) के प्रबंधन को आखिरकार श्रम विभाग की सख्त सुनवाई के आगे झुकना पड़ा। वर्षों से लंबित वेतन, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी, छंटनी मुआवजा और नोटिस पे को लेकर चल रहे विवाद में कंपनी ने दो श्रमिकों का बकाया भुगतान करने पर सहमति जताई।

आज श्रम अधीक्षक–2, जमशेदपुर श्री सत्येंद्र कुमार सिंह के समक्ष हुई सुनवाई में मजदूर नेता राजीव पांडे के प्रभावी हस्तक्षेप और निरंतर संघर्ष के परिणामस्वरूप कंपनी प्रबंधन ने—

श्री सीरिप हेंब्रम को ₹ 1,80,000/-

श्री राणा प्रताप को ₹ 1,60,000/-


का भुगतान किया। इस तरह कुल ₹ 3.40 लाख की राशि का भुगतान सुनिश्चित हुआ।

बताया गया कि दोनों श्रमिक पिछले 8 से 10 वर्षों से कंपनी परिसर में ठेकेदार मेसर्स साई इंजीनियरिंग के अधीन स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहे थे। इसके बावजूद “काम कम है” का हवाला देकर उन्हें बिना नोटिस और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कार्य से हटा दिया गया। यह कार्रवाई औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 का सीधा उल्लंघन मानी गई।

भुगतान की पुष्टि के बाद 20 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित आंदोलन/हड़ताल को वापस ले लिया गया, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक शांति बनी रही।

इस मौके पर मजदूर नेता राजीव पांडे ने कहा—

“यह जीत सिर्फ दो श्रमिकों की नहीं, बल्कि पूरे मजदूर वर्ग की है। जब मजदूर संगठित होकर कानूनी रास्ते से संघर्ष करते हैं, तो किसी भी बड़े प्रबंधन को जवाबदेह बनाया जा सकता है।”



यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि श्रम विभाग की सक्रिय भूमिका और संगठित मजदूर आंदोलन के माध्यम से श्रमिकों को उनका वैधानिक हक दिलाया जा सकता है। औद्योगिक क्षेत्र में यह फैसला आने वाले समय में अन्य श्रमिकों के लिए भी एक मजबूत नजीर बनेगा।

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