सेना के शौर्य को वकीलों का कोटि-कोटि प्रणाम, न्यायालय परिसर में लहराया तिरंगा

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जमशेदपुर, संवाददाता: 27 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई नृशंस हत्या का बदला लेते हुए भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर स्थित जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के कुल नौ प्रशिक्षण केंद्रों को ध्वस्त कर दिया गया। इस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है। देशभर के साथ-साथ जमशेदपुर के अधिवक्ताओं ने भी सेना की इस वीरता को नमन करते हुए न्यायालय परिसर में तिरंगा फहराया और भारत माता की जय, जय हिंद सेना, वंदे मातरम जैसे राष्ट्रभक्ति नारों से वातावरण गुंजायमान कर दिया।



इस अवसर पर अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू ने कहा, “देश की सुरक्षा और संप्रभुता से बढ़कर कुछ नहीं। सेना ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भारत की किसी नारी के सिंदूर पर आंच आई, तो पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का सामना कर रहा है, जिसमें महात्मा गांधी और इंदिरा गांधी जैसी महान विभूतियों को भी अपने प्राण गंवाने पड़े। अब समय आ गया है कि आतंकवाद के संरक्षक पाकिस्तान को निर्णायक सबक सिखाया जाए।

इस कार्यक्रम में पूर्व लोक अभियोजन पदाधिकारी सुशील कुमार जायसवाल, देवेंद्र सिंह, त्रिलोकी नाथ ओझा, रामजीत पांडेय, बबिता जैन, मोहम्मद कासिम, श्रीकांत सिंह, कुलविंदर सिंह, पंकज सिंह, राहुल राय, राहुल प्रसाद, संजीव सिंह, मलकीत सिंह सैनी, प्रकाश झा, राजू जी,

अधिवक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि पाकिस्तान ने बांग्लादेश युद्ध से भी कोई सबक नहीं लिया और आज उसकी भौगोलिक सीमाओं में बदलाव की आवश्यकता महसूस हो रही है। सुनील महतो, रतन चक्रवर्ती सहित अन्य कई अधिवक्ता उपस्थित रहे। उन्होंने एक स्वर में भारतीय सेना के शौर्य को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके साहस और बलिदान को स्वर्णाक्षरों में दर्ज करने योग्य बताया।

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