झारखंड हाईकोर्ट से विमल अग्रवाल और प्रतीक अग्रवाल को बड़ी राहत, 1.91 करोड़ रुपये गबन मामले की प्राथमिकी रद्द

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Jamshedpur : आशियाना गार्डन निवासी व्यवसायी विमल कुमार अग्रवाल एवं उनके पुत्र प्रतीक अग्रवाल को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने उनके खिलाफ दर्ज सोनारी थाना कांड संख्या 45/2025 तथा इससे संबंधित जीआर संख्या 966/2025 की कार्यवाही को खारिज कर दिया है।

मामला बिष्टुपुर स्थित शांति हरि आवासन निवासी शंकर लाल गुप्ता द्वारा दर्ज कराए गए शिकायत वाद से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने मेसर्स श्री नरसिंग कंस्ट्रक्शन के संचालक विमल कुमार अग्रवाल एवं प्रतीक अग्रवाल पर 1 करोड़ 91 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया था। अदालत के आदेश पर सोनारी थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

शिकायत के अनुसार वर्ष 2017 में विमल अग्रवाल और प्रतीक अग्रवाल ने रेलवे के ठेका कार्य में निवेश का प्रस्ताव दिया था। आरोप था कि राउरकेला में रेलवे परियोजना में निवेश के बदले लाभांश देने का आश्वासन देकर उनसे विभिन्न किश्तों में कुल 1.91 करोड़ रुपये लिए गए। दोनों पक्षों के बीच 14 जनवरी 2017 को एक एकरारनामा भी निष्पादित हुआ था।

मामले की सुनवाई के दौरान विमल अग्रवाल और प्रतीक अग्रवाल की ओर से यह दलील दी गई कि यह विवाद पूरी तरह व्यावसायिक एवं वित्तीय लेन-देन से जुड़ा है, न कि आपराधिक प्रकृति का। साथ ही यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता को लगभग 1.73 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं।

आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, बबिता जैन एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता निलेश कुमार ने क्रिमिनल मिस पिटीशन संख्या 1490/2026 दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि विवाद का स्वरूप मूलतः सिविल (दीवानी) प्रकृति का है और इसमें आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बनता।

इसके बाद न्यायालय ने सोनारी थाना में दर्ज प्राथमिकी एवं उससे संबंधित न्यायिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले को विमल कुमार अग्रवाल और प्रतीक अग्रवाल के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।

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