जैव विविधता दिवस पर गदरा में 100 पौधों का वितरण, नव्य-मानवतावादी विचारधारा को अपनाने का आह्वान

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आनंद मार्ग और PCAP जमशेदपुर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों को दिलाई गई जैव विविधता संरक्षण की शपथ

जमशेदपुर, गदरा। जैव विविधता दिवस के अवसर पर गदरा गांव में आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल एवं प्रीवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स एंड प्लांट्स (PCAP) जमशेदपुर के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों के बीच 100 फलदार पौधों का वितरण किया गया तथा उन्हें जैव विविधता संरक्षण की शपथ दिलाई गई।

इस अवसर पर संगठन के प्रतिनिधि सुनील आनंद ने कहा कि “वृक्षारोपण जैव विविधता को बढ़ावा देने का एक प्रभावी और जरूरी उपाय है। पेड़ न केवल जीवों को आश्रय और भोजन प्रदान करते हैं, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भी सहायक होते हैं।” उन्होंने बताया कि विविध प्रकार के वृक्ष लगाकर हम पक्षियों, कीटों, स्तनधारियों और परागणकों के लिए एक समृद्ध आवास प्रदान कर सकते हैं।

वृक्षारोपण के प्रमुख लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा:

  • आवास निर्माण: पेड़ पक्षियों, जानवरों और कीड़ों को सुरक्षित निवास प्रदान करते हैं।
  • पारिस्थितिक तंत्र का समर्थन: विविध वृक्षों से जैविक संतुलन कायम रहता है।
  • प्रजातियों का संरक्षण: विभिन्न प्रजातियों को टिकाऊ आवास मिलता है।
  • परागणकों का समर्थन: मधुमक्खियाँ और तितलियाँ जैसे परागणकों के लिए पेड़ बेहद ज़रूरी हैं।
  • कार्बन पृथक्करण: वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन को रोकते हैं।
  • भूमि संरक्षण: पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और उसे उपजाऊ बनाते हैं।

वृक्षारोपण के सुझाव:
कार्यक्रम में स्थानीय प्रजातियों को प्राथमिकता देने, विभिन्न प्रकार के वृक्ष लगाने और प्राकृतिक वनस्पति को संरक्षित रखने पर बल दिया गया।

कार्यक्रम के दौरान आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल ने अपने नव्य-मानवतावादी दृष्टिकोण को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम वृक्षों, पौधों, पशु-पक्षियों और समस्त प्राणियों को अपने परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक प्रकृति का संरक्षण अधूरा रहेगा।उन्होंने बताया कि नव्यमानवतावाद यह सिखाता है कि पृथ्वी पर केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि सभी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे और प्रकृति के तत्व इस धरती रूपी परिवार के अभिन्न सदस्य हैं। मनुष्य का कर्तव्य है कि वह अपने ‘बुद्धिमत्ता’ का उपयोग कर समस्त प्रकृति के कल्याण हेतु कार्य करे।”

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