दामिनी सबर का नर्स बनने का सपना हुआ साकार, रंभा नर्सिंग कॉलेज में डीईओ की उपस्थिति में हुआ नामांकन

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पूरी फीस माफ, हॉस्टल खर्च भी समाजसेवी ने लिया जिम्मा
गुलगुलिया समुदाय की पहली इंटर पास छात्रा बनी मिसाल

जमशेदपुर : समाज के सबसे वंचित तबकों में गिनी जाने वाली गुलगुलिया बस्ती की बेटी दामिनी सबर का नर्स बनने का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ चुका है। पोटका प्रखंड अंतर्गत गीतीलता स्थित रंभा नर्सिंग कॉलेज में शनिवार को उसका नामांकन करवा दिया गया। यह उपलब्धि न केवल दामिनी के व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता, सामाजिक सहयोग और शिक्षा के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।

उपायुक्त के निर्देश पर डीईओ पहुंचे कॉलेज, नामांकन की पूरी प्रक्रिया कराई पूरी

जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) मनोज कुमार स्वयं शनिवार को छात्रा दामिनी सबर को लेकर रंभा नर्सिंग कॉलेज पहुँचे और वहाँ उसकी जीएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) कोर्स में नामांकन की प्रक्रिया पूरी करवाई। कॉलेज के सचिव गौरव बचन, चेयरमैन, और चाकुलिया के समाजसेवी विनीत रुंगटा इस अवसर पर उपस्थित रहे।
यह गौर करने योग्य है कि उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने छात्रा की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए डीईओ को उसका नामांकन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया था। उसी के आलोक में आज यह महत्वपूर्ण कार्य साकार हुआ।

पूरे कोर्स की फीस माफ, हॉस्टल खर्च की जिम्मेदारी भी उठाई गई

पहले कॉलेज प्रबंधन ने छात्रा को आधी फीस माफ करने की पेशकश की थी, लेकिन जब छात्रा की पारिवारिक पृष्ठभूमि और कठिन परिस्थितियों की जानकारी कॉलेज प्रशासन को दी गई, तो कॉलेज सचिव गौरव बचन ने चेयरमैन से विशेष अनुमति लेकर पूरे तीन वर्षीय कोर्स (करीब ₹3.5 लाख) की फीस माफ कर दी।वहीं, समाजसेवी विनीत रुंगटा ने छात्रा के पूरे हॉस्टल खर्च की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है, जिससे दामिनी की नर्सिंग शिक्षा में कोई आर्थिक बाधा शेष नहीं रही।

ट्रेन में झाड़ू लगाने से नर्स बनने तक का सफर

दामिनी सबर की कहानी संघर्ष और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है। चाकुलिया नगर पंचायत कार्यालय के सामने स्थित गुलगुलिया बस्ती की निवासी दामिनी बचपन में ट्रेनों में झाड़ू लगाती थी, भीख मांगती थी, लेकिन शिक्षा के प्रति उसकी अद्वितीय ललक ने उसे भीड़ से अलग पहचान दी।
वर्ष 2023 में उसने मैट्रिक, और 2024 में इंटर (कला संकाय) की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिए उसके पास ना तो पैसे थे, ना जाति प्रमाणपत्र, और ना ही कोई मार्गदर्शक।

प्रशासन की संवेदनशील पहल और सामाजिक समर्थन से खुला भविष्य का द्वार

जब यह मामला उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने तत्परता दिखाते हुए डीईओ मनोज कुमार को दामिनी के नामांकन की पहल करने का निर्देश दिया। डीईओ ने सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल से संपर्क साधा, जिन्होंने कॉलेज प्रशासन से समन्वय स्थापित किया।
कॉलेज प्रशासन ने भी प्रशासनिक पहल का स्वागत करते हुए तत्काल सहमति दी और आज दामिनी का भविष्य न केवल उज्ज्वल हो गया, बल्कि यह प्रेरणा की एक नई कहानी भी बन गई।

तीन वर्षों बाद बनेगी नर्स, बनेगी प्रेरणा

अब दामिनी आगामी अगस्त 2025 से रंभा नर्सिंग कॉलेज में अध्ययन आरंभ करेगी और तीन वर्षों की पढ़ाई के बाद वह एक प्रशिक्षित नर्स के रूप में स्वावलंबी बनकर उभरेगी। साथ ही, वह उन सैकड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी जो विपरीत परिस्थितियों में भी सपना देखने का साहसकरती हैं।

प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास का उदाहरण

यह पहल दर्शाती है कि यदि प्रशासन, शिक्षा विभाग, और समाजसेवी मिलकर किसी छात्र के भविष्य की जिम्मेदारी लें, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
दामिनी सबर अब सिर्फ एक छात्रा नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत है — गरीबी से लड़कर शिक्षा की राह चुनने वालों के लिए एक उम्मीद की किरण।

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