विश्व भारती यूनिवर्सिटी, शांतिनिकेतन के युवा कलाकारों की प्रदर्शनी “चितरंग” का शुभारंभ

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Jamshedpur:गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की तपोभूमि शांतिनिकेतन की कला-सुगंध अब लौहनगरी जमशेदपुर में महसूस की जा सकती है। बंगाल क्लब स्थित नंदलाल बोस आर्ट गैलरी में शुक्रवार को विश्व भारती यूनिवर्सिटी, शांतिनिकेतन के नौ युवा कलाकारों की तीन दिवसीय कला प्रदर्शनी “चितरंग” का शुभारंभ हुआ।

मुख्य अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कुमार, वरिष्ठ कलाकार विप्लव राय और शिवेंदु विश्वास ने दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
यह प्रदर्शनी 10 से 12 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें दर्शक सुबह 11 बजे से शाम 8 बजे तक शांतिनिकेतन की कला और संवेदना का अनुभव कर सकेंगे।

प्रदर्शनी में सायोनी मित्रा, संपूर्णना मंडल, अभिषेक मंडल, राजकुमार हलधर, श्रेया दत्ता, अर्पण मंडल, सूरज दास, शुभोजीत बाउरी और तनुश्री बनर्जी की लगभग दो दर्जन कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं।
इन चित्रों में ग्रामीण भारत की आत्मा, परंपरा, आधुनिक दृष्टिकोण और पर्यावरणीय चिंताएं बखूबी झलकती हैं।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही श्रेया दत्ता की कला नाटिका, जिसमें कलाकार ने प्लास्टिक के बढ़ते प्रभाव पर गहरा संदेश दिया। नाटिका में दिखाया गया कि कैसे मनुष्य अपनी ही रची कृत्रिम दुनिया में कैद होता जा रहा है और प्रकृति के साथ उसका रिश्ता कमजोर पड़ता जा रहा है। यह प्रस्तुति न केवल दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है, बल्कि पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने की प्रेरणा भी देती है।

अतिथियों ने इस अवसर पर युवा कलाकारों की पहल की सराहना की और कहा कि शांतिनिकेतन की कला-संस्कृति को जमशेदपुर तक लाना एक प्रशंसनीय प्रयास है।
“चितरंग” केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और चेतना का संगम है, जो आगंतुकों को रवीन्द्रनाथ टैगोर के उस दर्शन की याद दिलाती है जहाँ कला जीवन का पर्याय है।

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