Jamshedpur : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में पिछले दो महीनों से सिजेरियन (ऑपरेशन) सेवा बंद रहने से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं सरायकेला विधायक चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
चंपाई सोरेन ने कहा कि सीएचसी में सर्जन की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते गरीब और ग्रामीण परिवार निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व में कार्यरत सर्जन को कथित लापरवाही के कारण जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद अब तक नए सर्जन की प्रतिनियुक्ति नहीं होने से सिजेरियन समेत अन्य शल्य चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि सरायकेला आदिवासी और ग्रामीण बहुल क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सेवाओं का बाधित होना आम जनता, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
चंपाई सोरेन ने स्वास्थ्य विभाग से अविलंब विशेषज्ञ सर्जन की नियुक्ति कर सिजेरियन सेवा बहाल करने की मांग की, ताकि जरूरतमंद महिलाओं को समय पर निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में सरायकेला में 100 बेड के क्रिटिकल केयर अस्पताल का निर्माण कराया गया था, लेकिन राज्य सरकार अब तक उसे चालू नहीं कर सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिसका सबसे अधिक खामियाजा गरीब और जरूरतमंद लोगों को भुगतना पड़ रहा है।







