जीएसटी ग्रिवांस कमेटी की बैठक में सिंहभूम चैंबर ने उठाए व्यापारियों के मुद्दे, पोर्टल और नियमों में सुधार की मांग

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Jamshedpur : जीएसटी ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी की बैठक में सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एससीसीआई) ने व्यापार एवं उद्योग जगत से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए जीएसटी पोर्टल, जीएसटी अपीलीय अधिकरण पोर्टल तथा जीएसटी अधिनियम एवं नियमों में आवश्यक सुधार के लिए विस्तृत सुझाव प्रस्तुत किए।

रांची में आयोजित बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, झारखंड-बिहार के मुख्य आयुक्त प्रदीप सक्सेना ने की, जबकि राज्य जीएसटी के सचिव-सह-आयुक्त अमित कुमार सह-अध्यक्ष रहे। बैठक में सीजीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जीएसटीएन के अधिकारी भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

सिंहभूम चैंबर का प्रतिनिधित्व अध्यक्ष मानव केडिया एवं उपाध्यक्ष (टैक्स एवं फाइनेंस) राजीव अग्रवाल ने किया। चैंबर ने जीएसटी पोर्टल पर रिटर्न डाउनलोड प्रक्रिया को सरल बनाने, स्पष्ट एरर मैसेज उपलब्ध कराने, बेहतर सेशन मैनेजमेंट तथा नोटिस एवं आदेशों की प्रभावी सूचना प्रणाली विकसित करने की मांग रखी।

इसके अलावा जीएसटी अपीलीय अधिकरण पोर्टल पर ऑफलाइन अपील यूटिलिटी, प्री-डिपॉजिट एवं ट्रिब्यूनल फीस के लिए एकीकृत ऑनलाइन भुगतान सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया। चैंबर ने कहा कि अपील शुल्क और अन्य निर्धारित शुल्क का भुगतान सीधे पोर्टल के माध्यम से हो, ताकि भारतकोष पोर्टल की अलग प्रक्रिया से होने वाली असुविधा समाप्त हो सके।

बैठक में चैंबर ने लंबित जीएसटी रिटर्न के लिए एकमुश्त एमनेस्टी योजना लागू करने की मांग भी उठाई। साथ ही सुझाव दिया कि ऑडिट पूरा होने के बाद उसी अवधि के लिए एएसएमटी-10 नोटिस जारी नहीं किया जाए तथा सामान्य ऑडिट मामलों में बिना पर्याप्त आधार के धारा-73 के मामलों को धारा-74 में परिवर्तित न किया जाए। चैंबर का कहना था कि जहां धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत जानकारी देने के साक्ष्य नहीं हों, वहां नियमानुसार धारा-73 के तहत ही कार्रवाई की जानी चाहिए।

बैठक में जीएसटी पंजीकरण निरस्तीकरण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया गया। चैंबर ने बताया कि कई मामलों में निरस्तीकरण के आवेदन लंबे समय तक लंबित रखे जाते हैं और बाद में अनावश्यक दस्तावेज मांगकर उन्हें अस्वीकृत कर दिया जाता है। इस पर राज्य जीएसटी के सचिव-सह-आयुक्त अमित कुमार ने संबंधित अधिकारियों को लंबित आवेदनों की नियमानुसार समीक्षा कर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया।

चैंबर ने यह मुद्दा भी उठाया कि जिन मामलों में प्रोपराइटर का निधन हो चुका है, उनमें उत्तराधिकारियों द्वारा जीएसटी रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन दाखिल नहीं हो पा रहा है। इस पर मुख्य आयुक्त प्रदीप सक्सेना ने कहा कि यह समस्या राष्ट्रीय स्तर की है और इसके स्थायी समाधान के लिए इसे सक्षम स्तर पर उठाया जाएगा।

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने सिंहभूम चैंबर द्वारा प्रस्तुत सभी सुझावों एवं समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और उन्हें संबंधित स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया। चैंबर ने विश्वास जताया कि इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय होने से जीएसटी प्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और व्यापार-अनुकूल बनेगी, जिससे करदाताओं और प्रशासन दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा।

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