कैंसर पीड़ित विधवा आदिवासी महिला के घर पर कथित कब्जा, बेटे संग मंदिर में शरण लेने को मजबूर

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Jamshedpur : बिरसानगर थाना क्षेत्र से एक अत्यंत संवेदनशील और मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। बिरसानगर ब्लॉक संख्या–3बी स्थित मकान संख्या–79 की निवासी निरूपा राय कारोवा ने आरोप लगाया है कि उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया गया है, जिसके कारण वह अपने 12 वर्षीय बेटे के साथ ठंड की रातें मंदिर में शरण लेकर गुजारने को मजबूर हैं।

पीड़िता ने इस संबंध में भूमि सुधार उपसमाहर्ता, पूर्वी सिंहभूम को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि वह एक विधवा आदिवासी महिला हैं और तृतीय चरण के कैंसर से पीड़ित हैं। वर्ष 2023 से उनका इलाज हैदराबाद में चल रहा है। इसी दौरान 27 अक्टूबर 2025 से राजा कारोवा और उसके साथियों द्वारा उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।

निरूपा राय कारोवा का आरोप है कि राजा कारोवा (निवासी—वादुडी, चाईबासा, थाना—मंझारी) ने अपने कथित गुंडों के साथ मिलकर उनके घर पर जबरन कब्जा कर लिया। इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और मकान में ताला लगाकर उन्हें अंदर प्रवेश करने से रोक दिया गया। मामले को लेकर आदिवासी हो समाज की ओर से बैठक भी बुलाई गई, लेकिन आरोपियों ने समाज की बात मानने से इनकार कर दिया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने उनके कैंसर की दवाइयां, इलाज से संबंधित दस्तावेज, बेटे की पढ़ाई की किताबें, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान जब्त कर लिए हैं। इसके अलावा, उनकी दो जर्सी गाय, दो बछड़े और चार विदेशी नस्ल के कुत्तों पर भी कथित रूप से कब्जा कर लिया गया है। पीड़िता का कहना है कि गाय का दूध बेचकर ही वह अपने और अपने बेटे के जीवनयापन का खर्च चलाती थीं।

पीड़िता के अनुसार, कड़ाके की ठंड में वह और उनका बेटा बीमार हैं, इलाज ठप पड़ा है और जीवन यापन का कोई साधन शेष नहीं रह गया है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनके मकान को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए और उनके पशुओं को भी वापस दिलाया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

निरूपा राय कारोवा ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र कार्रवाई करेगा और उन्हें न्याय दिलाएगा।

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