बायोमेट्रिक व्यवस्था पर एएलसी, सेल प्रबंधन और झामसंसं के बीच वार्ता

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Guwa : बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच शुक्रवार को किरीबुरू हिलटॉप स्थित केटीआई कॉन्फ्रेंस रूम में सहायक श्रम आयुक्त (एएलसी), सेल प्रबंधन और झारखंड मज़दूर संघर्ष संघ (झामसंसं) के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस वार्ता में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे, जबकि एएलसी ने कानून का पालन करते हुए औद्योगिक शांति बनाए रखने की अपील की।

बैठक के दौरान झामसंसं के महामंत्री राजेन्द्र सिंधिया ने कहा कि वर्ष 1973 से लागू सर्टिफाइड स्टैंडिंग ऑर्डर की धारा 16(बी) एवं 16(सी) के तहत कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की जाती रही है। उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा नियमों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए स्टैंडिंग ऑर्डर में संशोधन किए बिना इसे लागू करना नियमों के विपरीत होगा।

वहीं सेल प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक अमित विश्वास ने मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर का हवाला देते हुए बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता और औचित्य पर जोर दिया। प्रबंधन का कहना था कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उपस्थिति प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है।

यूनियन प्रतिनिधियों ने बैठक में यह भी जानकारी दी कि बायोमेट्रिक व्यवस्था को लेकर मामला वर्तमान में सीजीआईटी (केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण) कोर्ट में विचाराधीन है तथा इसकी अगली सुनवाई 15 जून को निर्धारित है। यूनियन ने औद्योगिक विवाद अधिनियम (आईडी एक्ट) की धारा 33 का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे एएलसी चाईबासा-सह-हजारीबाग ने दोनों पक्षों से कानून का सम्मान करने और खदान क्षेत्र में किसी भी प्रकार की औद्योगिक विवाद (आईआर प्रॉब्लम) की स्थिति उत्पन्न नहीं होने देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण वे इस संबंध में कोई आदेश पारित नहीं कर सकते।

बैठक में झामसंसं के अध्यक्ष रामा पाण्डे सहित किरीबुरू, मेघाहातुबुरु और गुवा इकाइयों के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे। विस्तृत चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि मामले की अगली न्यायिक सुनवाई तक बैठक को स्थगित रखा जाएगा।

यह मुद्दा खदान क्षेत्र के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है, जिस पर अब सभी की निगाहें 15 जून को होने वाली न्यायालयीन सुनवाई पर टिकी हैं।

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