Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले में मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिला बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा निर्धारित 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति के नियम में विशेष छूट देने की मांग की है। इस संबंध में मंच की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को उपायुक्त को आवेदन सौंपकर जिले की भौगोलिक परिस्थितियों और विद्यार्थियों की समस्याओं से अवगत कराया गया।
मंच का कहना है कि जिले के दुर्गम, वन क्षेत्र और आदिवासी बहुल इलाकों में रहने वाले अनेक विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से विद्यालय पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में उपस्थिति की अनिवार्यता के कारण विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा से वंचित करने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उनके शैक्षणिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
101 विद्यालयों के 3,060 विद्यार्थियों के प्रभावित होने की आशंका
बाल अधिकार सुरक्षा मंच के सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिमी सिंहभूम जिले के 101 विद्यालयों के लगभग 3,060 छात्र-छात्राएं इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। सर्वेक्षण में 1,616 छात्र और 1,445 छात्राएं शामिल बताए गए हैं।
मंच ने कहा कि कम उपस्थिति के पीछे केवल अनुशासनहीनता या लापरवाही को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। जिले के कई गांवों से हाई स्कूल की दूरी 10 से 15 किलोमीटर या उससे अधिक है। बरसात के मौसम में नदी-नालों में पानी भर जाने से आवागमन बाधित हो जाता है। इसके अलावा, परिवहन की कमी और विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं भी विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को प्रभावित करती हैं।
गरीबी, पलायन और बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी बड़ी चुनौती
मंच के अनुसार, जिले के कई विद्यालयों में पेयजल, शौचालय, बिजली और बैठने की समुचित व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। आर्थिक तंगी, गरीबी, पलायन और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बच्चों की पढ़ाई में बाधा बनती हैं।
मंच ने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण अभिभावक अपने बच्चों को दूर स्थित विद्यालयों में भेजने से हिचकिचाते हैं। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई बच्चों को कृषि कार्य, ईंट-भट्ठों और अन्य स्थानों पर मजदूरी के लिए परिवार के साथ जाना पड़ता है। इन परिस्थितियों का सीधा असर उनकी पढ़ाई और विद्यालय में उपस्थिति पर पड़ता है।
परीक्षा से वंचित होने पर बर्बाद हो सकता है एक साल
जिला बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने चिंता जताई कि यदि 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा का फॉर्म भरने से रोक दिया जाता है, तो उनकी एक वर्ष की पढ़ाई और शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है। खासकर ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह गंभीर समस्या बन सकती है।
मंच का कहना है कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का महत्वपूर्ण अधिकार है। इसलिए विद्यार्थियों की वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किए बिना उन्हें परीक्षा में शामिल होने के अवसर से वंचित करना उचित नहीं होगा।
मंच की प्रमुख मांगें
जिला बाल अधिकार सुरक्षा मंच ने उपायुक्त से विद्यार्थियों के हित में कई मांगों पर पहल करने का आग्रह किया है।
1. शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए विशेष छूट: पश्चिमी सिंहभूम जिले के पात्र कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों को मैट्रिक परीक्षा का फॉर्म भरने का अवसर देने के लिए 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता में विशेष छूट प्रदान की जाए।
2. 50 से 60 प्रतिशत उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को राहत: दुर्गम एवं अनुसूचित क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल करने की संभावना पर विचार किया जाए।
3. आठवीं उत्तीर्ण बच्चों का नामांकन सुनिश्चित हो: कक्षा आठवीं की वार्षिक परीक्षा या कंपार्टमेंट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सभी बच्चों का अगली कक्षा में नामांकन सुनिश्चित किया जाए और इसकी नियमित निगरानी की जाए।
4. विशेष उपस्थिति नीति बनाई जाए: पश्चिमी सिंहभूम जैसे भौगोलिक रूप से दुर्गम और आदिवासी बहुल जिले के विद्यार्थियों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष नीति बनाने की पहल की जाए।
5. विद्यालयों की बुनियादी समस्याएं दूर हों: शिक्षकों की कमी, परिवहन, पेयजल, शौचालय, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव को दूर करने के लिए संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कदम उठाए जाएं।
विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की अपील
मंच ने जिला प्रशासन और संबंधित शिक्षा विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यार्थियों के हित में आवश्यक पहल करने की अपील की है। मंच का कहना है कि नियमों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना है, न कि विषम परिस्थितियों में पढ़ाई करने वाले बच्चों के भविष्य के सामने अनावश्यक बाधाएं खड़ी करना।
मंच ने आग्रह किया कि विद्यार्थियों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए उन्हें मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने का उचित अवसर दिया जाए, ताकि आर्थिक और भौगोलिक कठिनाइयों के कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा बाधित न हो।
इस अवसर पर मंच के वरीय जिला उपाध्यक्ष जयप्रकाश लागुरी, तरुण चातार, जगन्नाथपुर विधानसभा अध्यक्ष मंजीत कोड़ा, मझगांव विधानसभा अध्यक्ष महावीर नायक, संग्राम लागुरी, निलंबर गोप और गंगाराम गागराई उपस्थित थे।

















