Manoharpur : गैर-राजनीतिक सामाजिक संगठन झारखंड पुनरुत्थान अभियान की ओर से मनोहरपुर अंचल कार्यालय के समीप क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद संगठन के सदस्यों ने अंचल अधिकारी के माध्यम से राज्यपाल के नाम पांच सूत्री ज्ञापन सौंपा।
जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की रक्षा की मांग
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक बहादुर उरांव ने आरोप लगाया कि सरकार नगर पंचायत के नाम पर आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन पर औद्योगिक कब्जे का रास्ता तैयार करना चाहती है। उन्होंने कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, मनोहरपुर क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और ग्रामसभा की सहमति के बिना नगर पंचायत का गठन करना उचित नहीं है।
वहीं, संगठन के केंद्रीय नेता सुन्नी सिंकू ने कहा कि नगर पंचायत बनने से आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों पर संकट बढ़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामसभा की शक्तियों को कमजोर कर भूमि दलालों और कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
ज्ञापन में शामिल हैं पांच प्रमुख मांगें
संगठन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें उठाई गईं—
- समता जजमेंट का अनुपालन: अनुसूचित क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक समता जजमेंट का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
- भूमि बैंक निरस्त करने की मांग: वर्ष 2016 में सरकार द्वारा संधारित भूमि बैंक को अविलंब निरस्त किया जाए।
- नगर पंचायत के प्रस्ताव रद्द हों: मनोहरपुर, गुआ, नोवामुंडी और झींकपानी को नगर पंचायत बनाने से संबंधित प्रस्तावित रिपोर्ट को रद्द किया जाए।
- वनाधिकार पट्टा और वनोपज की व्यवस्था: अबुआ वीर दिशोम वनाधिकार अभियान के तहत पात्र आदिवासियों और पारंपरिक वन निवासियों को भूमि की चौहद्दी के साथ वन पट्टा प्रदान किया जाए। साथ ही, वनोपज के विपणन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- ग्रामसभा के अधिकार और स्थानीय रोजगार: पेसा अधिनियम, 1996 के तहत बालू प्रबंधन का अधिकार पारंपरिक ग्रामसभाओं को सौंपा जाए। मानकी-मुंडा-डाकुआ प्रथा का सम्मान करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। स्थानीय योग्य अभ्यर्थियों को निजी एवं सार्वजनिक उपक्रमों में रोजगार उपलब्ध कराने तथा डीएमएफटी कोष से संचालित योजनाओं की न्यायिक समीक्षा कराने की भी मांग की गई।
धरना-प्रदर्शन में संगठन के प्रतिनिधियों के साथ स्थानीय ग्रामीण भी उपस्थित थे। संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्रीय संसाधनों, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था और आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
















